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    संभल हिंसा: 271 दिन की जांच के बाद खुला सच, 854 पन्नों की न्यायिक रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 01:32 AM (IST)

    संभल हिंसा की न्यायिक आयोग रिपोर्ट 854 पन्नों में मुख्यमंत्री को सौंपी गई, जिसमें 24 नवंबर 2024 की घटना का सच और पूर्व के दंगों का जिक्र है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. न्यायिक आयोग ने संभल हिंसा की 854 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी।

    2. हिंसा में 129 आरोपित गिरफ्तार, मास्टरमाइंड के गुर्गे अब भी जेल में।

    3. सपा सांसद जियाउर्रहमान की हिंसा भड़काने में भूमिका रिपोर्ट में।

    जागरण संवाददाता, संभल। जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में 24 नवंबर, 2024 को हुई संभल हिंसा के बाद गठित आयोग ने चार बार संभल में मौका मुआयना किया। इसके बाद वीडियो क्रान्फेंसिंग और पत्र के जरिये बयान दर्ज किए गए।

    271 दिन तक न्यायिक आयोग ने जांच-पड़ताल के बाद 25 अगस्त 2025 को कुल 854 (369 पेज हिंदी में अनुवादित व 485 अंग्रेजी में) की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी को सौंप दी। इसमें न सिर्फ संभल हिंसा का सच लिखा, बल्कि देश आजाद होने के बाद संभल में कब-कब दंगे हुए, इसका भी जिक्र है।

    प्रकरण में 129 आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं। इनमें चार लोगों की हत्या में आरोपित व हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा के गुर्गे मुल्ला आफरोज, वारिस व गुलाम अभी जेल में हैं। सभी मामलों में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल हो चुके हैं।

    विधानसभा में पेश न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उपद्रवियों को 19 से 24 नवंबर 2024 के बीच भीड़ जुटाने और हिंसा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिला।

    प्रस्तावित सर्वे से पहले स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) ने भी क्षेत्र की संवेदनशीलता और बड़ी भीड़ जुटने की आशंका जताई थी। इस पर 22 नवंबर को जामा मस्जिद के आसपास सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त कराने के साथ धारा-163 बीएनएसएस लागू की गई।

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    बावजूद इसके हुई हिंसा केवल शाही जामा मस्जिद या उसके आसपास तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहर के कई हिस्से इसकी चपेट में आए थे। उपद्रवियों ने चार लोगों की हत्या की थी। 30 से अधिक पुलिस अधिकारी व कर्मी घायल हुए थे। कई वाहन फूंके गए। करीब 1.15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 12 मुकदमों में 37 नामजद व 3,750 अज्ञात आरोपित थे।

    घटनास्थल का निरीक्षण कर एफएसएल, बैलिस्टिक विशेषज्ञों, ड्रोन वीडियो, मीडिया फुटेज, फोटोग्राफ और दस्तावेजी अभिलेखों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में 1978, 1990, 1992, 1995 और 2019 की घटनाओं व संभल की जनसांख्यिकी का भी जिक्र है।

    कुंदरकी में सियासी हार के बाद संभल में हिंसा का 'वार'

    कुंदरकी में विधानसभा उपचुनाव के दौरान मिली सियासी हार भी संभल हिंसा की साजिशों में शामिल है। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक मुरादाबाद के कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे जियाउर्रहमान संभल से सांसद बने। कुंदरकी में उपचुनाव हुआ। 23 नवंबर 2024 को मतगणना में सपा उम्मीदवार हाजी रिजवान को हार मिली।

    सांसद ने इसके लिए पुलिस-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। तत्कालीन डीएम-एसपी ने भी बयान में हिंसा को भड़काने में सांसद का मुख्य रोल बताया। जियाउर्रहमान ने मस्जिद की सीढ़ियों पर खड़े होकर बयानबाजी के साथ नारे भी लगवाए थे।

    सपा सांसद ने गिरफ्तारी से बचने को स्टे लिया। जामा मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अली को 23 मार्च 2025 को गिरफ्तार हुए, 131 दिन जेल में रहने के बाद जमानत मिली। इसके बाद अन्य आरोपितों को भी अलग-अलग न्यायालयों से राहत मिली।

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