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    मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी का रिपोर्ट कार्ड: जनता के बीच सक्रियता में अव्वल, वादों और उम्मीदों पर खरा उतरना बाकी

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 08:49 AM (IST)

    मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी के कार्यकाल में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है। हालांकि, बखिरा झील पर्यटन, स्थानीय उद्योग ...और पढ़ें

    अनिल कुमार त्रिपाठी, विधायक। जागरण

    अनिल कुमार त्रिपाठी, विधायक। जागरण

    HighLights

    1. मेंहदावल में सड़क, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास।

    2. बखिरा झील पर्यटन, स्थानीय उद्योग और रोजगार सृजन के वादे अधूरे।

    3. विधायक निधि का उपयोग, पर कई अहम परियोजनाएं लंबित हैं।

    जागरण संवाददाता, मेंहदावल। विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की तस्वीर पहले से बेहतर जरूर हुई है, पर स्वास्थ्य, पर्यटन, रोजगार, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ कई चुनावी वादों के अधूरे रहने से विधायक का रिपोर्ट कार्ड उपलब्धियों और अधूरी अपेक्षाओं दोनों का दस्तावेज बन गया है। उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा का पांच वर्षीय कार्यकाल अब अंतिम पड़ाव पर है।

    हमारे विधायक ने जिन वादों की पोटली के सहारे जनता का विश्वास जीता था, वह पूरा हुआ या नहीं। जागरण टीम ने यह जानने की कोशिश की। बस्ती, सिद्धार्थनगर और गाेरखपुर की सीमा से सटे मेंहदावल विधान सभा की बात करें तों यहां पर बदलाव की बयार बही जरूर लेकिन उसे अपेक्षित गति नहीं मिल पाई।

    मतदाताओं की नजर में सड़क, बिजली, सिंचाई और जनसंपर्क के क्षेत्र में सक्रियता दिखाई, लेकिन बखिरा झील को पर्यटन केंद्र बनाने, बखिरा बर्तन उद्योग को नई पहचान दिलाने, कछार क्षेत्र में सीएचसी की स्थापना, युवाओं के लिए रोजगार सृजन और पेयजल जैसी कई अहम योजनाएं अपेक्षित परिणाम तक नहीं पहुंच सकीं। कुल मिलाकर, विधायक की सक्रियता की चर्चा जितनी हुई, उतने ही अधूरे वादों पर भी सवाल उठते रहे।

    कालोनाइजर से राजनीति में आए अनिल त्रिपाठी चौथे प्रयास में भाजपा गठबंधन की सहयोगी निषाद पार्टी के टिकट पर मेंहदावल से विधायक बने। इनके प्रयास से विद्युत उपकेंद्रों का निर्माण, ट्रांसफार्मरों का उच्चीकरण, पुरानी विद्युत लाइनों को एबीसी केबल में बदलने और 50 से अधिक ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण जैसे कार्य हुए।

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    ''हर घर नल से जल'' योजना के तहत गांव-गांव पेयजल परियोजनाएं शुरू की गईं, लेकिन धरातल पर इसकी क्या स्थिति है, यह किसी से छिपी नहीं है। स्थानीय उद्योगों की बात करें तो एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल बखिरा के पारंपरिक बर्तन उद्योग को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पाया। बखिरा झील को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी गति नहीं पकड़ सकी। धर्मसिंहवा को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बावजूद मेंहदावल नगर पंचायत को नगर पालिका बनाने का सपना अधूरा है।

    कृषि क्षेत्र में नलकूपों की स्थापना और नहरों के सुधार का कार्य हुआ, लेकिन किसानों को हर सीजन खाद और बीज की कमी से जूझना पड़ा। आवास, पेंशन, दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल और आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं का लाभ मिला, मगर युवाओं को रोजगार और तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी।

    शिक्षक अनिल सिंह का कहना है कि अतरी नानकार-बेलौहा मार्ग, लोहरौली-भगौसा मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण हुआ, लेकिन मेंहदावल, बेलहर और सांथा क्षेत्र के 20 से अधिक संपर्क मार्ग आज भी बदहाल हैं। नगर विकास विभाग की वंदन योजना के तहत कई धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण हुआ, लेकिन कोपिया टीला और धर्मसिंहवा के बौद्ध स्तूप का विकास अभी अधूरा है।

    विधायक निधि की स्थिति: एक नजर में

    • 4 करोड़ रुपये सोलर लाइट लगाने पर।
    • 3 करोड़ रुपये विद्यालयों को अनुदान देने में।
    • 2 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों को उपलब्ध कराए गए।
    • 1 करोड़ रुपये जरूरतमंद रोगियों के उपचार पर।
    • 2 करोड़ रुपये क्षेत्र भ्रमण के दौरान प्राप्त जनसमस्याओं के समाधान एवं अन्य विकास कार्यों पर खर्च किए गए।

    बड़े वादे, जो अब भी अधूरे
    बखिरा झील का पर्यटन विकास, वेटलैंड में शामिल 17 गांवों के किसानों को मुआवजा, चोरमा रेगुलेटर का निर्माण, बेलौली में पक्का घाट, बखिरा बर्तन उद्योग का पुनर्जीवन, कछार क्षेत्र में सीएचसी, बघौली को नगर पंचायत और मेंहदावल को नगर पालिका बनाने जैसे प्रमुख वादे अभी तक पूरे नहीं हो सके हैं।

    प्रमुख उपलब्धियां

    • 50 से अधिक संपर्क मार्गों का निर्माण।
    • 8 प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण।
    • विद्युत उपकेंद्र और ट्रांसफार्मर उच्चीकरण।
    • एबीसी केबल विस्तार।
    • पेयजल योजनाओं का विस्तार।
    • नलकूप एवं नहर सुधार।
    • धर्मसिंहवा नगर पंचायत का गठन।
    • विधायक निधि के 18 करोड़ रुपये का उपयोग।

    स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार समय की जरूरत
    विधायक रोगियों की सेवा के प्रति समर्पित हैं। लेकिन सीएचसी में सुविधाएं बढ़नी चाहिए। हाईवे और वाहनों की बढ़ती रफ्तार के बीच ट्रामा सेंटर का निर्माण समय की जरूरत बन गया है। -डा. लक्ष्मीनाथ मिश्र, चिकित्सक

    तहसीलों में सुविधाएं बढ़े
    तहसील में कर्मचारियों और तकनीकी रूप से दक्ष कर्मियों की कमी से वादकारियों का हित प्रभावित हो रहा है। अधिवक्ताओं के लिए भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। -दिलीप भट्ट, अधिवक्ता

    शिक्षा में सुधार, पेंशन पर पहल जरूरी
    शिक्षकों के बुलाने पर विधायक हमेशा पहुंचते हैं। शिक्षा का स्तर सुधरा है और कैशलेस उपचार की सुविधा भी मिली है। अब पेंशन व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है। -धनंजय अग्रहरि, शिक्षक

    युवाओं को मिले रोजगार के पर्याप्त अवसर
    विधायक युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास करते रहे हैं। शिक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार संवाद करते हैं। लेकिन रोजगार सृजन की गति और तेज होनी चाहिए। -हर्ष नारायण मिश्र, युवा

    मेंहदावल विधानसभा

    हमने सड़क, पुल, सिंचाई, पेयजल, बिजली और पर्यटन विकास जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी। रही बात बखिरा झील की तो इसे ईको टूरिज्म का नया हब बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। कुछ कार्य प्रयासों के बावजूद पूरे नहीं हो सके हैं, जिसका मलाल है। समय कम है लेकिन अधूरी परियोजनाओं को पूरा कराने का पूरा प्रयास रहेगा।

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    -अनिल कुमार त्रिपाठी, विधायक

    शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ। ग्रामीण सड़कों की स्थिति भी काफी खराब है, किसान खाद-बीज के लिए भटक रहे हैं और बिजली व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। वर्तमान विधायक का पूरा कार्यकाल विफलताओं से भरा पड़ा है।

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    -जयराम पांडे,पूर्व प्रत्याशी व निकटतम प्रतिद्वंदी