संतकबीर नगर ठगी मामला: विक्रांत की 4 करोड़ की संपत्ति जब्त, गोरखपुर-लखनऊ में थी खरीदी
संतकबीर नगर में शेयर मार्केट ठगी के मास्टरमाइंड धनंजय शुक्ला के सहयोगी विक्रांत प्रकाश सिंह की 4 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त की जा रही हैं। विक्र ...और पढ़ें

संपत्तियों के जब्तीकरण के लिए कोर्ट पहुंची पुलिस, मामले में 27 जुलाई को होगी बहस। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
विक्रांत प्रकाश सिंह की 4 करोड़ की संपत्ति जब्त।
गोरखपुर और लखनऊ में खरीदी गई थी ये संपत्तियां।
शेयर मार्केट ठगी के 30 करोड़ रुपये से जुड़ी।
एसके सिंह, संतकबीर नगर। शेयर मार्केट में शर्तिया मुनाफे का झांसा देकर निवेशकों से 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह की जांच में नए-नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब पुलिस की नजर गिरोह के मास्टरमाइंड धनंजय शुक्ला के करीबी सहयोगी विक्रांत प्रकाश सिंह की करोड़ों की संपत्तियों पर है।
जांच में सामने आया है कि विक्रांत ने महज दो वर्षों के भीतर गोरखपुर और लखनऊ में चार करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियां खरीदीं, जिन्हें अब अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए जब्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने गोरखपुर के सहजनवां में फोरलेन किनारे, खजनी कस्बे तथा लखनऊ के चिनहट क्षेत्र में स्थित संपत्तियों को चिह्नित कर बीएनएस की धारा 107 के तहत जब्तीकरण के लिए न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल की है।
गुरुवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान जिला जेल में निरुद्ध विक्रांत प्रकाश सिंह को कोर्ट में पेश किया गया। उसके अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर अदालत ने अगली सुनवाई 27 जुलाई निर्धारित की है।
चार बैंक खातों से खरीदी गई करोड़ों की संपत्ति
सहजनवां में कंप्यूटर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट संचालित करने वाला विक्रांत प्रकाश सिंह संतकबीर नगर के गायघाट गांव का निवासी है। पुलिस जांच में उसके छह बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक आफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के चार खातों से गोरखपुर और लखनऊ की संपत्तियों की खरीद के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अब उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। आशंका है कि तीस करोड़ की ठगी की बड़ी रकम और खातों के माध्यम से भी इधर-उधर खपाई गई है।
पूछताछ में खुली थी सहयोगियों की परत
मुख्य आरोपित धनंजय शुक्ला और उसकी पार्टनर रजनी प्रजापति की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ और विवेचना में विक्रांत प्रकाश सिंह तथा सत्यप्रकाश यादव निवासी चंद्रहर सहित चार सहयोगियों के नाम सामने आए। विक्रांत और सत्यप्रकाश को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि दो अन्य आरोपित अब भी फरार हैं। इनमें एक बस्ती और दूसरा संतकबीर नगर का निवासी बताया जा रहा है।
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ऐसे खुला था 30 करोड़ की ठगी का खेल
इस बहुचर्चित मामले का खुलासा 18 अक्टूबर 2025 को हुआ था, जब हटवा निवासी संतराम मौर्य ने महुली थाने में 51 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया। मामले में कुशीनगर निवासी धनंजय शुक्ला, उसकी पार्टनर रजनी प्रजापति (बिलासपुर, छत्तीसगढ़), इंजीनियर संजय दास निवासी अगरतला समेत 13 लोगों को नामजद किया था।
मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ी तो करोड़ों रुपये के डिजिटल ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। विवेचक उपनिरीक्षक ललितकांत के अनुसार हाईस्कूल पास धनंजय शुक्ला कंप्यूटर तकनीक का गहरा जानकार है। उसने अपनी पार्टनर के साथ मिलकर टीवीएस साल्यूशन डाट इन और एआइपीएल ऐप के जरिए ऐसा डिजिटल नेटवर्क तैयार किया, जिसमें निवेशकों को अधिक मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई।