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    शामली में बिना लोन लिए उपभोक्ता के नाम कर्ज दर्शाने के मामले में PNB के दो अफसर दोषी, लगा 75 हजार का जुर्माना

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 12:18 AM (IST)

    जिला उपभोक्ता आयोग ने बिना ऋण लिए उपभोक्ता के नाम पर फर्जी लोन दर्शाने के मामले में पीएनबी के दो अफसरों को दोषी ठहराया है। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    HighLights

    1. पीएनबी के दो अफसरों पर 75 हजार का जुर्माना।

    2. बिना लोन फर्जी कर्ज दर्शाने पर उपभोक्ता आयोग की कार्रवाई।

    3. उपभोक्ता का सिविल स्कोर खराब, मानसिक-आर्थिक क्षतिपूर्ति का आदेश।

    जागरण संवाददाता, शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिना ऋण लिए ही उपभोक्ता के नाम पर फर्जी लोन दर्शाने और सिविल स्कोर खराब करने के मामले में पंजाब नेशनल बैंक के अफसरों को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। उपभोक्ता आयोग ने पीएनबी की गोरखपुर स्थित विकास भवन शाखा के तत्कालीन प्रबंधक व तत्कालीन फील्ड ऑफिसर पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाने के साथ ही पीड़ित को 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति व वाद व्यय देने का आदेश दिया है।

    थानाभवन क्षेत्र के गांव चंदेनामाल निवासी सुशील कुमार ने 27 मार्च 2023 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया था। अवगत कराया कि उसने अपने घर निर्माण के लिए सहारनपुर स्थित आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में 15 लाख रुपये के होम लोन के लिए आवेदन किया था।

    लोन प्रक्रिया के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि विदित मित्तल ने बताया कि पीएनबी की विकास भवन शाखा गोरखपुर में पीड़ित के नाम पर पहले से ही 4.20 लाख रुपये का ऋण बकाया दर्शाया जा रहा है। इस कारण उनका सिविल स्कोर खराब हो चुका है, और नया लोन स्वीकृत नहीं किया जा सकता।

    बैंक रिपोर्ट देखकर वह स्तब्ध रह गया, क्योंकि उसने पीएनबी की इस शाखा से कभी कोई ऋण नहीं लिया था और न ही कोई दस्तावेज या हस्ताक्षर सौंपे थे। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों व हस्ताक्षर के आधार पर गोरखपुर स्थित शाखा में खाता संचालित कर लोन पास कर दिया गया था।

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    गोरखपुर से जुड़े इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने पर पीड़ित ने स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन समाधान न होने पर न्यायालय सीजेएम शामली की शरण ली। न्यायालय के 18 जनवरी 2023 के आदेश पर थानाभवन पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। फर्जी लोन की वजह से पीड़ित का नया गृह ऋण निरस्त हो गया, जिससे मकान खरीदने के लिए दिया गया चार लाख रुपये का बयाना भी डूब गया।

    इस आर्थिक क्षति और सामाजिक बदनामी के चलते पैदा हुए तनाव के कारण उपभोक्ता की पीड़ित की माता का भी देहांत हो गया। उपभोक्ता आयोग ने पत्रावली, साक्ष्य और तथ्यों का गहन निरीक्षण करने के बाद पीएनबी के तत्कालीन शाखा प्रबंधक व तत्कालीन फील्ड आफिसर को सेवा में घोर लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया।

    उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने सदस्य अमरजीत कौर एवं अभिनव अग्रवाल की मौजूदगी में आदेश जारी किए जिसमें दोनों अधिकारियों पर संयुक्त रूप से 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है, जिसे बैंक के क्षेत्रीय महाप्रबंधक द्वारा आहरित कर राजकीय कोष में जमा कराया जाएगा।

    इसके साथ ही पीड़ित को हुई मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए 20 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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