भैंस मर गई मगर किसान को मिलेंगे ₹90000, सिर्फ 45 दिन में मिलेगा पूरा पैसा!
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भैंस का बीमा क्लेम खारिज करने पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी पर जुर्माना लगाया है। कंपनी को 50 हजार रुपये बीमा राशि ब् ...और पढ़ें

HighLights
उपभोक्ता आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी पर जुर्माना लगाया।
भैंस बीमा क्लेम खारिज करने पर कंपनी को दोषी पाया।
कंपनी को 90 हजार रुपये भुगतान करने का आदेश।
जागरण संवाददाता, शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पशु बीमा क्लेम खारिज करने पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी मेरठ के शाखा प्रबंधक पर जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय देते हुए आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह मृतक भैंस की बीमा राशि 50 हजार का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करें। वहीं अर्थदंड व क्षतिपूर्ति के लिए 40 हजार रुपये देने होंगे।
गांव टिटोली निवासी मोहित कुमार ने नौ नवंबर 2022 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया था। उपभोक्ता ने अवगत कराया कि उसने चार फरवरी 2019 को अपनी भैंस का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से कराया था, जिसका प्रीमियम 282 रुपये भरा गया था और टैग नंबर आवंटित हुआ था।
दुर्भाग्यवश, 12 जनवरी 2020 को उसकी भैंस की मृत्यु हो गई। उसने समय पर बीमा कंपनी को सूचना दी और पशु चिकित्सा अधिकारी से पोस्टमार्टम भी कराया। जब उसने क्लेम मांगा तो बीमा कंपनी ने यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया कि समय पर सब्सिडी न मिलने के कारण मृत्यु की तिथि पर पालिसी वैध नहीं थी।
बताया कि कंपनी के इस रवैये से परेशान होकर उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया गया। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने सदस्य अमरजीत कौर मौजूदगी में सुनवाई की। आयोग ने स्पष्ट किया कि परिवादी मोहित ने अपनी ओर से समय पर प्रीमियम जमा कर दिया था और बीमा की सभी प्रक्रियाओं को पूरा किया था।
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कंपनी द्वारा सब्सिडी का बहाना बनाकर क्लेम रोकना सेवा में भारी लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार है। जिस पर आयाेग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी उपभोक्ता को 50 हजार की बीमा राशि क्लेम निरस्त करने की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देगी।
वहीं परिवादी को हुई शारीरिक, आर्थिक और मानसिक पीड़ा के लिए 20 हजार रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए कंपनी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो सरकारी राजकोष में जमा होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन में करना होगा। यदि निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।