बांसी विधानसभा का रिपोर्ट कार्ड: सड़क-स्वास्थ्य ने बदली तस्वीर, औद्योगिकीकरण से भविष्य की उम्मीद
बांसी विधानसभा में विधायक जय प्रताप सिंह के चार साल के कार्यकाल में सड़क और स्वास्थ्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विकास हुआ है। औद्योगिकीकरण की नई संभावन ...और पढ़ें

जय प्रताप सिंह, विधायक, बांसी। जागरण
HighLights
विधायक निधि का 60% ग्रामीण सड़कों पर खर्च हुआ।
बांसी अस्पताल 50 शैय्या का हुआ, PHC सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना।
गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेस-वे के पास औद्योगिक क्षेत्र की उम्मीद।
जितेन्द्र पाण्डेय, सिद्धार्थनगर। बांसी विधानसभा क्षेत्र से आठवीं बार विधायक जय प्रताप सिंह के चार वर्ष के कार्यकाल में सड़क और स्वास्थ्य क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं, जबकि औद्योगिकीकरण की नई संभावनाएं भी आकार ले रही हैं। विधायक निधि से मिले करीब 21 करोड़ रुपये में 60 प्रतिशत धन छोटी ग्रामीण सड़कों पर खर्च किया गया।
पुल-पुलिया पर 10 से 15 प्रतिशत, विद्यालयों पर करीब 10 प्रतिशत और बिजली संबंधी कार्यों पर लगभग पांच प्रतिशत धन लगाया गया। असाध्य रोगियों के उपचार के लिए करीब 25 लाख रुपये की सहायता दी गई। करीब चार करोड़ रुपये की निधि अभी मिलनी शेष है।
विधानसभा में उनकी उपस्थिति शत-प्रतिशत रही। चार वर्षों में उन्होंने क्षेत्रीय विकास से जुड़े 10 प्रश्न उठाए, हालांकि कोई निजी विधेयक या प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया। विधायक का तर्क है कि वरिष्ठ सदस्य होने के कारण अनेक स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए वह संबंधित मंत्रालय और शासन स्तर पर सीधे पहल करते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में बांसी अस्पताल को 50 शैय्या की क्षमता वाला बनाया गया, जहां प्रतिदिन 700 से 800 रोगी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया। इससे सामान्य उपचार के लिए जिला मुख्यालय जाने की निर्भरता कम हुई है। सड़क क्षेत्र में जिगनिहवा-चेतिया, बांसी-धानी, बेलौहा-घोसियारी बाजार, डिड़ई-घोसियारी, पचपेड़िया-मरवटिया, करही-कुर्थिया और बेलवा-मरवटिया मार्ग का निर्माण कराया गया। तिलौरा-लक्ष्मीगंज मार्ग पर काम चल रहा है। चार नई सड़कों के प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजे गए हैं।
खबरें और भी
बिजली के क्षेत्र में पुराने तार बदलने, एबीसी केबल लगाने, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और नए उपकेंद्र बनाने से आधारभूत ढांचा मजबूत हुआ, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित समय के अनुरूप निर्बाध आपूर्ति की चुनौती कायम है। गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेस-वे के आसपास करीब 800 हेक्टेयर भूमि में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की कोशिश भविष्य की बड़ी उम्मीद है।
मदुवापुर का कामन फैसिलिटी सेंटर कालानमक चावल के प्रसंस्करण और निर्यात का आधार बना है। बांधों की मरम्मत, बांसी बस स्टेशन के जीर्णोद्धार और विद्यालयों के जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है।
पर्यटन में कोई बड़ी नई परियोजना सामने नहीं आई, हालांकि मंदिरों के विकास पर जोर दिया गया है। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रों तक पहुंचाने और जनता दर्शन के माध्यम से समस्याओं के समाधान की कोशिश भी कार्यकाल का हिस्सा रही है।
जनता की प्रतिक्रिया
सड़कों और बस स्टेशन की स्थिति सुधरने से कारोबार को सुविधा मिली है। प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र विकसित हुआ तो बांसी के बाजार को नई गति मिलेगी। व्यापारियों की अपेक्षा है कि बिजली आपूर्ति बेहतर हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने वाले उद्योग शीघ्र स्थापित किए जाएं। -राजेश कुमार उर्फ गुड्डू गुप्ता, व्यापारी
एक्सप्रेस-वे और प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र से रोजगार की उम्मीद जगी है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलेगा जब परियोजना शीघ्र धरातल पर उतरे। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर सुविधाएं विकसित करने की अभी पर्याप्त आवश्यकता है। -अमय पाण्डेय, युवा
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए आधारभूत सुविधाओं के साथ शिक्षकों की उपलब्धता, डिजिटल संसाधन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण पर अधिक ध्यान अपेक्षित है। -जय प्रकाश श्रीवास्तव, शिक्षक
क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार दिखाई देता है। आम लोगों की राजस्व, पुलिस और प्रशासन से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। -ईश्वर चंद दुबे, अधिवक्ता
यह भी पढ़ें- सिद्धार्थनगर में पुल का एप्रोच धंसा, सड़क के बीच हुआ गहरा गड्ढा; राहगीरों में परेशानी
पहले की तुलना में सड़क और अस्पताल की सुविधाएं बेहतर हुई हैं। स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने से बुजुर्गों को राहत मिली है। गांवों में बिजली आपूर्ति, क्षतिग्रस्त सड़कों और सार्वजनिक परिवहन की समस्या अभी बनी हुई है। इन सुविधाओं में सुधार से ग्रामीण जीवन और आसान हो सकेगा। -राम प्रताप गिरी, बुजुर्ग
आवास, शौचालय और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से परिवारों को लाभ मिला है, लेकिन पात्रता के बावजूद कई लोगों को योजनाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षित आवागमन और नियमित बिजली आपूर्ति को और बेहतर किए जाने की जरूरत है। -अनुपम उपाध्याय
मैं चुनाव के समय जनता के सामने वादों की लंबी सूची रखने के बजाय क्षेत्र की जरूरतों को समझकर काम कराने में विश्वास करता हूं। चार वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने, गांवों को बेहतर सड़क संपर्क देने और बिजली के आधारभूत ढांचे में सुधार की दिशा में लगातार काम हुआ है। विधायक निधि का सबसे बड़ा हिस्सा छोटी ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर लगाया गया, क्योंकि गांवों में आवागमन की सुविधा विकास की पहली आवश्यकता है। जरूरतमंद रोगियों के उपचार में भी निधि से सहायता दी गई। जल जीवन मिशन के कारण खराब हुई सड़कों की समस्या गंभीर है और इसे विधानसभा से लेकर शासन स्तर तक उठाया गया है। औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से बांसी के युवाओं के लिए रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे। मेरी प्राथमिकता चुनाव से पहले प्रस्तावित चार नई सड़कों को स्वीकृति दिलाने के साथ अधूरे विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए नियमित संवाद और प्रयास जारी रहेगा।
-जय प्रताप सिंह, विधायक, बांसी
विधायक जय प्रताप सिंह जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके हैं। विधानसभा क्षेत्र की अनेक सड़कों की स्थिति आज भी दयनीय है और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। बांसी तहसील क्षेत्र में फायर स्टेशन स्थापित कराने का वादा किया गया था, लेकिन चार वर्ष बाद भी यह पूरा नहीं हुआ। क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं के दौरान अग्निशमन वाहन दूर से आने के कारण लोगों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ता है। बांसी नगर को यातायात के दबाव से राहत दिलाने के लिए बाईपास की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। विकास के दावों का आकलन धरातल पर मौजूद समस्याओं के आधार पर होना चाहिए।
-मोनू दूबे, सपा नेता एवं पिछले चुनाव के निकटतम प्रतिद्वंद्वी