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    ईरान पर हमले से सिद्धर्थनगर में पसरा सन्नाटा, जिले के आठ छात्रों का टूटा संपर्क टूटा

    Updated: Sun, 01 Mar 2026 05:50 PM (IST)

    ईरान-इजराइल तनाव और ईरान पर हुए हमलों के बाद सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज स्थित हल्लौर कस्बे में गहरी चिंता है। ईरान के कुम शहर में धार्मिक शिक्षा ले रह ...और पढ़ें

    जिले के आठ छात्रों का टूटा संपर्क टूटा।

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    जागरण संवाददाता, डुमरियागंज। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव तथा शनिवार को ईरान पर हुए हमलों की खबर ने सिद्धार्थनगर को सदमे में डाल दिया है। यहां डुमरियागंज तहसील अंतर्गत शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में गहरी चिंता का वातावरण पैदा हो गया है। कस्बे के आठ युवक धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए ईरान के कुम शहर में रह रहे हैं। शनिवार दोपहर लगभग 12 बजे के बाद से इन छात्रों से स्वजन का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

    हमले के बाद ईरान के कई हिस्सों में सुरक्षा कारणों से संचार सेवाएं बाधित होने की सूचना है। इसी कारण हल्लौर में बैठे स्वजन अपने पाल्यों की कुशलक्षेम जानने को व्याकुल हैं। घरों में टीवी समाचारों पर टिकी निगाहें और हाथों में थमे मोबाइल फोन लगातार मिलाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर से कोई उत्तर नहीं मिल रहा।

    माताएं बच्चों की सलामती की दुआ कर रही हैं, तो पिता हर नई सूचना पर नजर गड़ाए बैठे हैं। दिसंबर 2025 में कस्बे के चार युवक उच्च धार्मिक शिक्षा के लिए कुम रवाना हुए थे। वे मदरसा शहीद-ए-सालिस में अध्ययनरत हैं।

    सैय्यद सुजैन हैदर रिजवी के पिता सैय्यद मोहम्मद हैदर, सैय्यद सुजा अब्बास के पिता यूसुफ हुसैन, मेंहदी अब्बास के पिता हैदर मेहंदी, सैय्यद मोहम्मद रिजवी के पिता रियाज अहमद और सैय्यद सुहेल रिजवी पुत्र साबिर अली बताते हैं कि शनिवार दोपहर अंतिम बार बच्चों से बात हुई थी। इसके बाद से नेटवर्क पूरी तरह ठप है।

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    सिर्फ नए छात्र ही नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों से कुम स्थित मदरसा इमाम खुमैनी में अध्ययन कर रहे मौलाना सैय्यद आदिल अब्बास पुत्र हसन अब्बास और मौलाना महफूज हुज्जत पुत्र सदलू हसन के परिवार भी गहरी चिंता में हैं। हल्लौर के नजर अब्बास भी वहीं मौजूद हैं।

    कस्बे की गलियों में असामान्य शांति है। मस्जिदों में दुआओं का दौर चल रहा है। अभिभावकों का कहना है कि युद्ध जैसी स्थिति और संचार सेवाओं के बाधित होने से अनिश्चितता बढ़ गई है। पूरे कस्बे की निगाहें अब सुरक्षित समाचार की प्रतीक्षा में टिकी हैं।

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