नेपाल में जलप्रलय का खौफनाक मंजर, अपनों की तलाश में अब 'DNA' का सहारा
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों की पहचान अब डीएनए ...और पढ़ें
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नेपाल में जलप्रलय।- अभिनव राजन चतुर्वेदी
HighLights
भोटेकोशी बाढ़ में लापता लोगों की पहचान डीएनए से होगी।
नेपाल पुलिस ने परिजनों से रक्त के नमूने मांगे।
1252 शव बरामद, 4200 से अधिक लोग अभी भी लापता।
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों की पहचान के लिए अब डीएनए जांच का सहारा लिया जाएगा। नेपाल पुलिस ने अज्ञात शवों और शरीर के अंगों की पहचान के लिए डीएनए जांच संबंधी सूचना जारी की है। इसमें नेपाली नागरिकों के साथ विदेशी नागरिकों के लापता होने की स्थिति में उनके परिजनों से रक्त के नमूने उपलब्ध कराने को कहा गया है।
नेपाल पुलिस के अनुसार, लापता व्यक्ति के प्रथम श्रेणी के रिश्तेदार यानी पिता, माता, बेटा या बेटी के रक्त नमूने से बरामद शव या शरीर के अंग का डीएनए मिलान किया जाएगा। नेपाल में रहने वाले परिजन नेपाल पुलिस अस्पताल, महाराजगंज, काठमांडू की रोग जांच प्रयोगशाला अथवा नजदीकी जिला पुलिस कार्यालय में ताजा रक्त का नमूना दे सकते हैं। इसके साथ दो पासपोर्ट आकार के चित्र भी देने होंगे। विदेश में रहने वाले परिजन अपने देश की अधिकृत प्रयोगशाला में डीएनए जांच करा सकते हैं।
जांच से तैयार डीएनए विवरण की साफ्ट कापी नेपाल पुलिस के dnacodis@nepalpolice.gov.np ईमेल पर भेजी जा सकती है। नेपाल पुलिस ने इंटरनेट माध्यम पर यह जानकारी साझा की है। परिजनों से लापता व्यक्ति का पूरा नाम, राष्ट्रीयता, पासपोर्ट अथवा पहचान संबंधी विवरण, लापता होने की तिथि व स्थान तथा नमूना देने वाले व्यक्ति से संबंध की जानकारी भी मांगी गई है।
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1,252 शव बरामद, 4,200 से अधिक लापता
नेपाल के विदेश मंत्रालय की नवीनतम जानकारी के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 1252 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 4200 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल सरकार के अनुसार, 11993 लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 300 से अधिक विदेशी नागरिक हैं।
करीब 590 विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी है। लगातार जारी खोज और बचाव अभियान के बीच आंकड़ों का सत्यापन भी किया जा रहा है। ऐसे में डीएनए जांच से अज्ञात शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।
