अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूपी के इस खास चावल की जबरदस्त डिमांड, पहली बार सिंगापुर जाएगी 1000 टन की खेप
सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल पहली बार 1000 टन की रिकॉर्ड खेप के साथ सिंगापुर निर्यात किया जाएगा। ...और पढ़ें

कालानमक धान की फसल

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। बुद्ध की धरती की पहचान बन चुका कालानमक चावल अब वैश्विक बाजार में नई ऊंचाई छूने जा रहा है। अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए प्रसिद्ध कालानमक चावल की जिले से पहली बार एक हजार टन की रिकॉर्ड खेप सिंगापुर भेजी जाएगी।
अब तक सिंगापुर समेत अन्य देशों को अधिकतम 50 टन तक ही कालानमक का निर्यात हो सका था। ऐसे में यह न केवल जिले बल्कि पूरे पूर्वांचल के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे कालानमक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और हजारों किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
मधुवापार स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर के संचालक अभिषेक सिंह और सिंगापुर की संस्था जेन बुद्धा के बीच इसके लिए सहमति बन चुकी है। समझौते के तहत 20 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक चरणबद्ध तरीके से एक हजार टन कालानमक चावल सिंगापुर भेजा जाएगा। इसके लिए सिद्धार्थनगर के चार और महराजगंज के एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के साथ भी समझौता हो चुका है।
कालानमक को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने के बाद इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को नई गति मिली है। बुद्ध की धरती की पहचान बने इस धान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बढ़ावा मिल रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इटली दौरे के दौरान खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक को सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल भेंट कर इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूती दी थी।
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जिले में बीते दो वर्षों के दौरान आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, कालानमक महोत्सव और विभिन्न प्रचार कार्यक्रमों ने भी इसकी मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कामन फैसिलिटी सेंटर संचालक अभिषेक सिंह ने बताया कि किसानों से 50 से 75 रुपये प्रति किलो तक की दर से धान खरीदा जाएगा।
जो किसान चार टन या उससे अधिक कालानमक धान उपलब्ध करा सकेंगे, उनके घर से सीधे खरीद की व्यवस्था होगी। इससे किसानों को परिवहन और कुटाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कालानमक की मांग उत्पादन की तुलना में कहीं अधिक है।
बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने एजेंटों के माध्यम से जिले में खरीदारी कर रही हैं। कुशीनगर की प्रविधान कंपनी, टू ब्रदर्स और इंडिया गेट बासमती जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां भी यहां सक्रिय हैं। वर्तमान में 20 से अधिक कंपनियां जिले में कालानमक की खरीद के लिए काम कर रही हैं।
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ब्लॉकों में भेजे गए 200 क्विंटल बीज
उधर कृषि विभाग भी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विशेष प्रयास कर रहा है। जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय ने बताया कि इस बार जिले के 14 ब्लाकों के बीज गोदामों पर 200 क्विंटल कालानमक बीज उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 14 एफपीओ अपने सदस्य किसानों को भी बीज उपलब्ध करा रहे हैं।
निजी विक्रेताओं ने भी कालानमक बीज की मांग को देखते हुए पर्याप्त भंडारण किया है। जिले में 500 से अधिक किसान अपने संरक्षित बीज का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष कालानमक का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
कालानमक चावल की एक हजार टन की खेप का सिंगापुर निर्यात होना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे ओडीओपी उत्पाद को वैश्विक पहचान मिलेगी, किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित निर्यात को नई दिशा प्राप्त होगी।
वीके वर्मा, उपायुक्त उद्योग