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    सिद्धार्थनगर में नकली शराब के कारोबार का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 03:48 PM (GMT+05:30)

    सिद्धार्थनगर में पुलिस, स्वाट टीम और आबकारी विभाग ने नकली अंग्रेजी शराब के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा मे ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. सिद्धार्थनगर में नकली शराब के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश।

    2. दो आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में सामान बरामद।

    3. पुलिस, स्वाट टीम और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई।

    जागरण संवाददाता, बांसी, (सिद्धार्थनगर)। जिले में नकली अंग्रेजी शराब के कारोबार पर पुलिस, स्वाट टीम और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। संयुक्त टीम ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 32,472 विभिन्न ब्रांड के नकली ढक्कन, 12,752 क्यूआर कोड स्टीकर, 16 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब तथा मिलावटी शराब तैयार करने में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के साथ आबकारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश शुरू कर दी है।

    स्वाट टीम को जरिए मुखबिर सूचना मिली कि रानीगंज तिराहे के पास देवियापुर नरकटहा निवासी बलराम जायसवाल नामक व्यक्ति मौजूद है जो नकली शराब तैयार करता है। टीम तत्काल मौके पर पहुंच कर उसे गिरफ्त में ले लिया। पूछताछ के बाद उसकी निशानदेही पर कोइलहवा सुभाषनगर स्थित किराये के गोदाम में छापेमारी की गई, जहां से विभिन्न ब्रांडों के 32,300 नकली ढक्कन और 12,612 क्यूआर कोड स्टीकर बरामद हुए। इसके बाद संयुक्त टीम डुमरियागंज थाना क्षेत्र के पटखौली नंबर-दो स्थित कंपोजिट अंग्रेजी शराब की दुकान पहुंची।

    पुलिस के अनुसार दुकान के पीछे बने कमरे में हरदोई निवासी प्रदीप कुमार पुरानी शराब की बोतलों को दोबारा पैक कर नए ब्रांड के रूप में तैयार करता मिला। मौके से 172 नकली ढक्कन, 140 क्यूआर कोड स्टीकर, 16 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब, इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन, चाकू और सूजा बरामद किया गया।

    पूछताछ में आरोपितों ने नकली ढक्कन और क्यूआर कोड स्टीकर के जरिए पुरानी बोतलों को नए जैसा बनाकर बेचने की बात पुलिस के सामने स्वीकार की। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा सप्लाई चेन की जांच कर रही है।

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    कैसे चलता था नकली शराब का खेल

    • गोदाम में विभिन्न ब्रांडों के नकली ढक्कन और क्यूआर कोड स्टीकर जमा किए जाते थे।
    • इन्हें शराब दुकानों तक पहुंचाकर खाली बोतलों में दोबारा भरी गई शराब पर लगाया जाता था।
    • बोतलों में बची शराब में पानी मिलाकर उन्हें नए ब्रांड की बोतल जैसा स्वरूप दिया जाता था।
    • नकली ढक्कन और क्यूआर कोड लगने के बाद बोतलों को असली बताकर बाजार में बेच दिया जाता था।