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    नहीं रहे साहित्य भूषण रमाकांत पांडेय 'अकेले', 95 साल की उम्र में हुआ निधन; साहित्य जगत में शोक

    Updated: Sun, 07 Jun 2026 09:32 PM (GMT+05:30)

    साहित्य भूषण रमाकांत पांडेय 'अकेले' का 95 वर्ष की आयु में सीतापुर के ब्रह्मावली गांव में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है। ...और पढ़ें

    रमाकांत पांडेय ‘अकेले’, फाइल फोटो

    रमाकांत पांडेय ‘अकेले’, फाइल फोटो

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    संवाद सूत्र, सीतापुर। साहित्य भूषण रमाकांत पांडेय ‘अकेले’ ने शनिवार की रात 95 वर्ष की आयु में अपने ब्रह्मावली गांव स्थित आवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना से साहित्य प्रेमियों, समाजसेवियों, राजनीतिक गलियाराें में शोक की लहर दौड़ गई। जिसको भी सूचना मिली, उनके अंतिम दर्शन को पहुंचा।

    अंतिम यात्रा में विधायक शशांक त्रिवेदी, देवशंकर मिश्र, कवि राजकुमार तिवारी, हिंदी सभा अध्यक्ष आशीष मिश्र, मनीष बाजपेयी, मुन्ना मिश्र आदि शामिल हुए। उनको मुखाग्नि पौत्र राजू पांडेय ने दी। जूनियर हाईस्कूल में संस्कृत शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए रमाकांत पांडेय अकेले का हिंदी साहित्य में काफी योगदान रहा।

    'हिंदी गौरव सम्मान’ से किया गया था सम्मानित

    उन्होंने लगभग 70 से अधिक ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सामाजिक उपन्यासों की रचना की, जिनमें ‘सिद्धपीठ सिलहट’, ‘बावला’, ‘साहित्य संयुक्त’, ‘मितौलगढ़’, ‘कर्ण-सुवर्ण’, ‘प्रायश्चित’, ‘शब्दभेदी सम्राट’, ‘प्रभादित्य’, ‘पांचाली’, ‘फेरों के फेर’, ‘सिलहट मैया’ तथा ‘करजोरी’ जैसी चर्चित कृतियां विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

    उनकी रचनाएं हिंदी साहित्य को नई दिशा नई चेतना और ऐतिहासिक दृष्टि प्रदान करती हैं। 74 ऐतिहासिक एवं पौराणिक उपन्यासों की रचना की, 14 पांडुलिपियां अभी भी अप्रकाशित हैं।

    उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में सपा सरकार में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने 14 सितंबर 2016 को उन्हें ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। इसके अतिरिक्त हिंदी सभा सीतापुर की ओर से उन्हें ‘हिंदी गौरव सम्मान’ प्रदान कर उनके यशस्वी साहित्यिक जीवन का अभिनंदन किया गया था।

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