सीतापुर में सरायन और पिरई नदियों के फ्लड जोन से हटेगा अतिक्रमण, चलेगा बुलडोजर
सीतापुर में सरायन और पिरई नदियों के दोनों किनारों पर 50-50 मीटर के फ्लड जोन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। ...और पढ़ें

सीतापुर: सिविल लाइन में सरायन नदी के समीप बने मकान: जागरण
HighLights
सरायन-पिरई नदियों का 50 मीटर फ्लड जोन होगा अतिक्रमण मुक्त।
अतिक्रमण हटाने के लिए अवैध भवनों पर चलेगा बुलडोजर।
नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बहाल होगा, भूजल स्तर बढ़ेगा।
जागरण संवाददाता, सीतापुर। सरायन व पिरई नदी के दोनों तरफ 50-50 मीटर फ्लड प्लेन जोन को चिह्नित कर उसे अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा। फ्लड जोन नदियों के आसपास के भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने में मददगार होते हैं।
सरायन व पिरई नदी के पुनरोद्धार को लेकर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी गई है। शासन से मंजूरी मिलते ही इन नदियों के फ्लडजोन में बने भवनों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया जाएगा।
जिले में सरायन नदी 195 किलोमीटर की दूरी में बहती है। नदी हरगांव ब्लाक के हैदरपुर के पास जिले की सीमा में प्रवेश करती है। यह हरगांव, ऐलिया, खैराबाद, मछरेहटा, कसमंडा, गोंदलामऊ होकर सिधौली ब्लाक के मनवा-कंटाइन के बीच गोमती नदी में मिलती है। इसके दोनों किनारों पर नगर के साथ ही 152 गांव हैं। पिराई के किनारों 62 गांव और नगर का कुछ हिस्सा है।
नगर में इन नदियों के किनारे पर कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए गए हैं। नगर में सरायन नदी के तट पर दुर्गापुरवा, तरीनीपुर, शस्त्रीनगर, सिविल लाइंस, रोटीगोदाम और कनवाखेड़ा पुल के पास दोनों तरफ कब्जा है। पिरई नदी की धार से सटाकर एक बिल्डर ने दीवार खड़ी कर दी है।
इसके अलावा का पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। इसको लेकर प्रशासन ने सख्त रवैया अपना लिया है। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने फ्लड जोन निर्धारित करने का प्रेजेक्ट बनाया है। इसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया है। इसमें अतिक्रमण की स्थित को दर्शाया गया है।
क्या है फ्लड प्लेन जोन
फ्लड प्लेन जोन नदी के आसपास प्राकृतिक रूप से तैयार होते हैं। यह नदी का वह किनारा है जहां बारिश व बाढ़ का पानी जमा हो जाता है। इसका प्रबंधन नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने में मददगार होता है। इनसे भूजल को रिचार्ज करने में मदद मिलती है।
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सरायन व पिरई के दोनों तरफ 50-50 मीटर की दूरी में फ्लड जोन को अतिक्रमण से मुक्त किया जाएगा। इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बरकरार रहेगा और भूजल रिचार्ज होता रहेगा।
-विशाल पोरवाल, अधिशासी अभियंता शारदा नहर
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