रिहंद बांध का जलस्तर उम्मीद से काफी नीचे, तापीय बिजली परियोजनाओं पर मंडराया संकट
रिहंद बांध का जलस्तर मानसून की कमजोर सक्रियता के कारण उम्मीद से काफी नीचे है, जिससे तापीय और जल विद्युत परियोजनाओं के लिए आगामी वर्ष चुनौतीपूर्ण हो सक ...और पढ़ें

रिहंद बांध का जलस्तर उम्मीद से काफी नीचे।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। जनपद सहित मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में मानसून की कमजोर सक्रियता का सीधा असर रिहंद बांध के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। जुलाई माह समाप्त होने को है, लेकिन बांध में जलभराव उम्मीद के अनुरूप नहीं हो सका है।
ऐसे में बांध पर निर्भर तापीय एवं जल विद्युत परियोजनाओं के लिए आने वाला वर्ष चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कैचमेंट क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा न होने के कारण रिहंद बांध का जलस्तर लगातार घटते हुए 20 जुलाई तक 841.4 फीट पर पहुंच गया था।
इसके बाद कैचमेंट क्षेत्र में मानसूनी बारिश शुरू होने से जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई लेकिन पिछले दस दिनों में यह वृद्धि मात्र चार फीट ही दर्ज की गई। 30 जुलाई की सुबह बांध का जलस्तर 845.4 फीट रिकार्ड किया गया जबकि पिछले वर्ष इसी दिन यह 868.1 फीट था।
इस प्रकार इस वर्ष जलस्तर पिछले वर्ष की तुलना में 22.7 फीट कम है, जिसे विशेषज्ञ चिंताजनक मान रहे हैं। अगस्त व सितंबर में अच्छी बारिश होने पर ही स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
फिलहाल कमजोर मानसून ने बिजली उत्पादन से जुड़े विभागों की चिंता बढ़ा दी है और सभी की निगाहें अब आने वाले दिनों की वर्षा पर टिकी हैं।
बांध से मिलता है औद्योगिक व ऊर्जा को विकास
रिहंद बांध का निर्माण होने के बाद इस क्षेत्र में औद्योगिक एवं ऊर्जा विकास को नई गति मिली थी। केंद्र और राज्य सरकारों ने इसके जल पर आधारित कई बड़ी तापीय बिजली परियोजनाएं स्थापित कीं।
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इनमें एनटीपीसी की रिहंदनगर, सिंगरौली और शक्तिनगर परियोजनाओं के अलावा अनपरा तापीय बिजली परियोजना, रेणुसागर तथा ओबरा तापीय परियोजनाएं प्रमुख हैं। इन सभी संयंत्रों की शीतलन प्रणाली और उत्पादन प्रक्रिया के लिए बड़ी मात्रा में पानी रिहंद बांध से ही उपलब्ध कराया जाता है।
सस्ती बिजली बनाने का भी प्रमुख कारक
इसके अतिरिक्त रिहंद जल विद्युत परियोजना से भी वर्षभर आवश्यकता के अनुसार सस्ती बिजली का उत्पादन किया जाता है।
ऐसे में यदि मानसून के शेष दिनों में भी जलस्तर में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई तो आगामी महीनों में जल प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकता है। इसका असर तापीय बिजली संयंत्रों के संचालन और उत्पादन क्षमता पर भी पड़ने की आशंका है।
30 जुलाई को पिछले वर्षों में रिहंद जलाशय का जलस्तर (फीट में)
- 2017 – 859.30
- 2018 – 844.60
- 2019 – 838.30
- 2020 – 851.40
- 2021 – 847.30
- 2022 – 840.30
- 2023 – 838.80
- 2024 – 838.20
- 2025 – 868.10
- 2026 – 845.40
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