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    प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना: सोनभद्र में जागरूकता की कमी से पंजीकरण पिछड़ा, पूर्वांचल में बलिया अव्वल

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 07:29 PM (IST)

    सोनभद्र में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के पंजीकरण में निराशाजनक प्रगति हुई है, सात साल बाद भी आंकड़ा सात हजार तक नहीं पहुंचा। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सोनभद्र में पीएम श्रम योगी मानधन योजना पंजीकरण में धीमी प्रगति।

    2. पूर्वांचल में बलिया अव्वल, वाराणसी दूसरे, भदोही सबसे पीछे।

    3. जागरूकता की कमी से सोनभद्र में श्रमिकों का पंजीकरण कम।

    जागरण संवाददाता, सोनभद्र। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में सोनभद्र की प्रगति निराशाजनक है। योजना शुरू होने के करीब सात वर्ष बाद भी जिले में लाभार्थियों का पंजीकरण सात हजार तक नहीं पहुंच सका है।

    सोनभद्र में अब तक केवल 6,995 श्रमिकों ने ही योजना से जुड़कर पंजीकरण कराया है। पूर्वांचल के जिलों में भदोही की स्थिति सबसे खराब है, जहां महज 4,165 पंजीकरण हुए हैं।

    भारत सरकार ने 15 फरवरी 2019 को इस स्वैच्छिक एवं अंशदायी पेंशन योजना की शुरुआत की थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसका औपचारिक शुभारंभ पांच मार्च 2019 को किया। योजना के तहत 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जिनकी मासिक आय 15,000 या उससे कम है पात्र होते हैं।

    इनमें घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, मोची, दर्जी, रिक्शा चालक, कृषि श्रमिक समेत अन्य असंगठित श्रमिक शामिल हैं। निर्धारित अंशदान जमा करने पर 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को न्यूनतम तीन हजार रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान है।

    पूर्वांचल के जनपद की यह है स्थिति

    पूर्वांचल के जिलों की तुलना करें तो बलिया 17,534 पंजीकरण के साथ पहले स्थान पर है, जबकि वाराणसी 16,748 पंजीकरण के साथ दूसरे स्थान पर है। आजमगढ़ में 15,213, जौनपुर में 12,713, गाजीपुर में 11,243, मीरजापुर में 8,514, मऊ में 7,933, चंदौली में 7,396, सोनभद्र में 6,995 और भदोही में 4,165 पंजीकरण दर्ज किए गए हैं।

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    जागरूकता की कमी पंजीकरण में बड़ी बाधा

    सोनभद्र आदिवासी बाहुल्य जनपद है। योजना के प्रति जागरूकता की कमी, पात्र श्रमिकों तक पर्याप्त जानकारी नहीं पहुंचना तथा पंजीकरण अभियान में अपेक्षित तेजी न होने के कारण सोनभद्र के श्रमिक बहुल जिले में भी लाभार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। यदि व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तो अधिक से अधिक असंगठित श्रमिक इस सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ उठा सकते हैं।

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