यूपी में मानसून के सक्रिय होने से कम हुई बिजली की खपत, इकाइयों ने घटाना शुरू किया उत्पादन
मानसून की सक्रियता के कारण उत्तर प्रदेश में बिजली की खपत में 10.6% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस गिरावट के चलते ऊर्जा प्रबंधन ने महंगी दरों पर बि ...और पढ़ें

प्रदेश में 10.6 प्रतिशत घटी बिजली की मांग।
HighLights
मानसून की सक्रियता से उत्तर प्रदेश में बिजली खपत 10.6% कम हुई।
महंगी दरों पर बिजली उत्पादन करने वाली इकाइयों का उत्पादन घटाया गया।
तापमान में गिरावट और उमस कम होने से मांग में कमी आई।
जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। प्रदेश में मानसून की सक्रियता का असर अब बिजली की मांग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बारिश, तापमान में गिरावट और उमस कम होने से पिछले 24 घंटे में प्रदेश की बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को प्रदेश की कुल बिजली खपत 562.2 मिलियन यूनिट थी, जो बुधवार को घटकर 502.5 मिलियन यूनिट रह गई। यानी एक ही दिन में 59.7 मिलियन यूनिट, करीब 10.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बिजली की मांग घटने के बाद ऊर्जा प्रबंधन ने महंगी दरों पर बिजली उत्पादन करने वाली इकाइयों का उत्पादन प्राथमिकता के आधार पर कम करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले उन संयंत्रों का उत्पादन घटाया गया है, जहां बिजली उत्पादन लागत अधिक है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार मांग कम होने पर सरकारी तापीय और जल विद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली अपेक्षाकृत सस्ती बिजली को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि निजी बिजली उत्पादक कंपनियों (आईपीपी) से खरीदी जाने वाली महंगी बिजली में कटौती की जाती है।
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अधिकारियों का कहना है कि यदि मानसून इसी तरह सक्रिय रहा और बारिश जारी रही तो आगामी दिनों में बिजली की मांग में और कमी आ सकती है। ऐसी स्थिति में निजी क्षेत्र की अन्य महंगी इकाइयों का उत्पादन भी अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
साथ ही दूसरे राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों से खरीदी जाने वाली महंगी बिजली में भी कटौती की जाएगी। फिलहाल प्रदेश में बिजली उपलब्धता मांग के अनुरूप बनी हुई है और ग्रिड संचालन पूरी तरह संतुलित है। ऊर्जा निगम का प्रयास न्यूनतम लागत पर निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना है।