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    एंटी माइक्रोबियल पालिसी अनिवार्य, कम एंटीबायोटिक्स लिखने के लिए डॉक्टर होंगे प्रेरित: डॉ. JP सिंह

    Updated: Sun, 15 Feb 2026 04:27 PM (IST)

    सुलतानपुर में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों ने एंटीबायोटिक्स के उपयोग व दुरुपयोग पर चर्चा की। डॉ. जेपी सिंह ने एंटी माइक्रोबियल प ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    संवाद सूत्र, सुलतानपुर। एंटीबायोटिक्स के उपयोग व दुरुपयोग पर चर्चा समय की मांग है। शरीर को माइक्रोबैक्टीरियल रेसिस्टेंस से बचाने के लिए सबसे पहले चिकित्सकों को आगे आना होगा। सभी संस्थानाें में इसे लेकर एंटी माइक्रोबियल पालिसी बनाई जाए और प्रत्येक चिकित्सक की ओपीडी में इसे अनिवार्य रूप से लिखवाया जाए। जिससे चिकित्सक कम से कम एंटीबायोटिक्स लिखने के लिए प्रेरित हों और मरीज भी इसके दुष्प्रभाव को पढ़ सके। यह बातें वरिष्ठ चिकित्सक डा. जेपी सिंह ने कही।

    वे मेडिकल कालेज दूबेपुर के सभागार में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में चिकित्सकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शरीर के चारों ओर सुरक्षात्मक कवर होता है। यह जितना घना होगा, उतना ही बैक्टीरिया के हमले से सुरक्षित होगा।

    रेसिस्टेंस का सवाल ही नहीं

    इससे इम्युनिटी बढ़ेगी और फिर रेसिस्टेंस का सवाल ही नहीं। कहा कि मेडिकल प्रोफेशन में श्रद्धा व विश्वास की मुख्य भूमिका होती है। चिकित्सक दवा के साथ ही उन्हें तनाव, चिंता व नकारात्मक सोच से दूर रहने की सलाह दें।

    पूर्व प्राचार्य डा. सलिल श्रीवास्तव ने कहा कि यह कार्यक्रम इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के दिवंगत मशहूर सर्जन डा. तहलियानी को भी समर्पित होना चाहिए। उन्होंने अपने हरेक सर्जरी में कम-से-कम एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि कल्चर जांच जरूरी है। इसी के आधार पर संक्रमण के प्रकार के आधार पर एंटीबायोटिक्स की सलाह दी जा सकती है। प्रभारी प्राचार्य डा. प्रियांक वर्मा ने कहा कि मरीजों को सीधे काउंटर से ऐसी दवाओं की मांग से बचना चाहिए।

    खबरें और भी

    इसके लिए अस्पताल में जगह-जगह जागरूकता संबंधी पोस्टर भी लगाए जाएंगे। डा. सुपर्णा दुबे ने कहा कि दवाओं के सलाह व उसके सेवन के प्रति चिकित्सक व मरीज दोनाें काे धैर्य का परिचय देना चाहिए। डा. एसी फूकन ने कहा कि वायु मंडल में असंख्य अदृश्य बैक्टीरिया पाए जाते हैं। कई प्रकार के बैक्टीरिया मानव, पशु-पक्षी समेत पारिस्थितिकीय तंत्र के लिए लाभदायक हैं।

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    डा. मनीष ने बताया कि मेडिकल कालेज के प्रत्येक विभाग से कल्चर जांच की व्यवस्था की जाएगी। इस मौके पर डा. अमित, डा. पवन कुमार सिंह, डा. प्रतिभा त्रिपाठी, डा. सौम्या सिंह, डा. मीनू पाल, डा. सिद्धांत लोहिया, डा. कमलजीत, डा. विशाल, डा. सुमित, डा. दिव्यानी, डा. आनंद, डा. शशि, डा. मुदब्बिर, डा. रविकांत, डा. अमन समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।