उन्नाव एक्सप्रेसवे निर्माण में बड़ी खामियां, 100 मीटर तक तीन फीट गहरी खोदाई कर नए सिरे से बन रही सड़क
उन्नाव एक्सप्रेसवे पर मरम्मत के बावजूद सड़क धंसने व फटने की समस्या बनी हुई है, जिसकी जांच एनआईटी वारंगल के इंजीनियरों ने शुरू कर दी है। ...और पढ़ें

तस्वीर- फाइल।

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जागरण संवाददाता, उन्नाव। बड़े से बड़े पैचों में पुख्ता मजबूती के दावे के साथ एक ओर एक्सप्रेसवे की मरम्मत होती है तो दूसरी ओर बड़ी खामी तैयार मिलती है। यही कारण है कि अब भी एक्सप्रेसवे पर दो स्थानों पर जहां 100 मीटर तक सड़क तीन फीट गहराई में खोदकर संबंधित स्थानों पर नए सिरे से बनाई जा रही है।
वहीं अन्य स्थानों पर भी 20 से 50 मीटर तक सड़क दबने, फटने, जर्क आने, स्लिपेज होने जैसी समस्याएं आ गई हैं। वहीं गुरुवार से मार्ग निर्माण गुणवत्ता की जांच शुरू हो गई है। एनआइटी (नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी) वारंगल राज्य आंध्र प्रदेश के इंजीनियर मार्ग की दो स्तर पर जांच कर रहे हैं।
जिसमें सड़क की अलग व किनारे से मिट्टी की अलग जांच होगी। इंजीनियर संबंधित दोनों की स्तर की जांच के नमूने लेकर एक पखवारे में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर देने का दावा कर रहे हैं।
एनआईटी के इंजीनियर रवींद्र यादव की अगुवाई में छह सदस्यीय टीम मय लेबर के सड़क को छह इंच गोलाकार आकार में खोदकर नमूने ले रही है। इंजीनियर रवींद्र ने बताया कि हमलोग सड़क पर 68 स्थानों से नमूने लेंगे। यह काम ग्रीन फील्ड एरिया क्षेत्र जिसमें एक ओर 45 जबकि, आवागमन की दोनों लेन मिलाकर कुल 90 किमी पर किया जा रहा है।
जांच एजेंसी एनआइटी टेस्टिंग के लिए सड़क पर प्रत्येक डेढ़ किमी पर खोदकर नमूने ले रही है। नमूने लिए जाने के बाद तत्काल उस स्थान को बंद भी किया जा रहा है। इंजीनियर रवींद्र ने बताया कि जांच सड़के अलावा मिट्टी की भी होगी।
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इसके लिए एक्सप्रेसवे मार्ग के किनारे पर कच्चे स्थान से 22 जगहों पर नमूने एकत्र किए जाएंगे। सड़क की जांच में मार्ग की मोटाई, डाली गई बिटुमिन व अन्य सामग्री की गुणवत्ता व मानक देखे जाएंगे।
वहीं मिट्टी को जांचने के लिए तीन दिन तक यह नमूने पानी में डालकर रखे जाएंगे। जिसमें देखा जाएगा कि मिट्टी नीचे बैठ रही है अथवा ऊपर तैर रही है। बताया कि यह जांच 14 दिन में पूरी हो जाएगी। सभी नमूने एनआईटी वारंगल ही जांचेगी। रिपोर्ट हम 15 दिन में दे देंगे।
ओवरलोडिंग से नहीं फट व धंस सकती सड़क
एनआइटी इंजीनियर रवींद्र ने बताया कि यह मार्ग 120 टन भार क्षमता के हिसाब से बनाया गया है। जबकि, ट्रक हो अन्य वाहन अधिकतम 60 से 90 टन भार लेकर इस मार्ग पर आ रहे हैं।ऐसे में यह कहना उचित न होगा कि यह मार्ग ओवरलोडिंग के कारण फट अथवा धंस रहा है।
फिर भी वर्जित कर दिया गया भारी वाहनों का प्रवेश
एक्सप्रेसवे पर बुधवार दोपहर के बाद टोल वसूली बंद कर दी गई है। वहीं गुरुवार को दोपहर 3:30 बजे के बाद मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश ग्रीन फील्ड एरिया में कोरारी, बनी व आजाद मार्ग टोल से बंद कर दिया गया। हालांकि जो वाहन लखनऊ के शहीद पथ से एक्सप्रेसवे का एलीवेटेड क्षेत्र तय करके आ रहे हैं। वह भारी वाहन संबंधित उक्त टोल से निकल भी रहे हैं।
विशेषज्ञ ने दी राय
लोक निर्माण विभाग में अधिशाषी अभियंता के पद से 31.5 साल नौकरी करके सेवानिवृत्त हुए सुबोध कुमार ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर मिट्टी का काम सही तरीके से नहीं हुआ है।मिट्टी पूरी क्षमता के साथ सतह तक नहीं बैठ सकी।
यदि मार्ग बनने से पहले डाली व दबाई गई मिट्टी को अच्छी एक दो बरसातें व मिल जातीं तो यह समस्या न आती है। बताया कि मिट्टी की पीआई वैल्यू ज्यादा होती है। जिससे मार्ग पर प्लास्टिीसिटी की समस्या हो गई है। नीचे बरसात का पानी पहुंच चुका है। जो लगातार खामी बना रहा है। वहीं डामर के वैट्स से भी पानी अंदर तक जा रहा है।
यहां फटा नया पैच, धंसी सड़क
61.9 से 62 पर किमी उन्नाव से लखनऊ लेन पर सड़क धंस गई है। गोलाकार आकार में धंसी सड़क के पास ही जलभराव है। किमी 33 पर कच्चे स्थान पर हुए गड्ढे दबाने के लिए मशीनें काम करती मिलीं। किमी 29.8 पर सड़क पर किया पैच फट गया है।