उन्नाव जिला अस्पताल की OPD में आने वाला हर चौथा शख्स डायरिया पीड़ित, इमरजेंसी में एक बेड पर दो-दो मरीज
उन्नाव जिला अस्पताल में गर्मी बढ़ने के साथ ही डायरिया और बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इमरजेंसी में 29 मरीज भर्ती हुए, जिससे बेड का संकट ...और पढ़ें

HighLights
उन्नाव अस्पताल में डायरिया-बुखार के 29 मरीज भर्ती।
इमरजेंसी में एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाए गए।
दूषित पानी और खानपान से बढ़ रही बीमारियां।
जागरण संवाददाता, उन्नाव। पारा बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। वायरल फीवर के रोगियों की संख्या तो बढ़ ही रही है। टाइफाइड के रोगी भी बढ़ रहे हैं। डायरिया व पेट की बीमारियों का आलम यह है कि जिला अस्पताल ओपीडी में आने वाला हर चौथा मरीज उल्टी दस्त, पेट दर्द की शिकायत लेकर आ रहा है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि डायरिया बढ़ने का प्रमुख कारण खानपान में लापरवाही तथा टाइफाइड के रोगी बढ़ने का कारण दूषित पानी का सेवन है। वहीं इमरजेंसी में डायरिया, पेट दर्द और वायरल फीवर के 29 रोगी भर्ती किए गए। एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाने के बाद भी बेड की समस्या बनी रही।
बुधवार को भी जिला अस्पताल ओपीडी में रोगियों की खासी भीड़ रही। ओपीडी में 1512 रोगी पहुंचे जिनमें 539 बच्चे शामिल रहे। बालरोग विशेषज्ञ डा. बृज कुमार ने बताया कि ओपीडी में 137 बच्चे देखे जिनमें 35 बच्चे उल्टी दस्त पेट दर्द से पीड़ित आए।
इसी तरह फिजीशियन कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि ओपीडी में 168 मरीज देखे जिनमें 46 रोगी गर्मी के कारण होने वाले उल्टी, दस्त व पेट दर्द से पीड़ित आए। चिकित्सकों का कहना है कि इस समय पारा बढ़ने के कारण ओपीडी में औसतन हर चौथा मरीज डायरिया व पेट दर्द की शिकायत लेकर आ रहा है।
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फिजीशियन डा. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि खान पान में लापरवाही और दूषित पानी के कारण डायरिया अधिक हो रहा है। बालरोग विशेषज्ञ डा. बृज कुमार ने बताया बच्चों में डायरिया का प्रमुख कारण बाजार का फास्ट फूड खाना सामने आ रहा है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गर्मी से बचाव करने, ताजा भोजन करने, बाजार की बनी तली भुनी चीजें न खाने और जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं उन्हें हरबार पांच मिनट तक बोतल पानी में खौलाने के बाद ही दूध देने की सलाह दी।
पौष्टिक आहार, तरल पदार्थ अधिक देने की भी सलाह दी। वहीं इमरजेंसी में भी रोगियों की लाइन लगी रही। डायरिया और पेट दर्द के 22 तथा वायरल फीवर के सात रोगी भर्ती किए गए। रोगी बढ़ने के कारण इमरजेंसी में एक बेड पर दो-दो रोगी लिटाए जाने के बाद भी बेड का संकट बना रहा।