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    सावन माह में काशी में गंगा के किस घाट से श‍िव के अभ‍िषेक का लें जल, काशी के ज्‍योत‍िषाचार्य ने बताई अनोखी बात

    By Dhyan chandra sharmaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Fri, 10 Jul 2026 01:44 PM (IST)

    काशी के ज्योतिषाचार्य डॉ. कमलेश झा ने सावन माह में शिव अभिषेक के लिए गंगा जल लेने के महत्व और विशेष घाटों की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि आदिकेशव, ...और पढ़ें

    सावन में काशी के इन घाटों से लें गंगा जल, शिव अभिषेक का मिलेगा विशेष फल।

    सावन में काशी के इन घाटों से लें गंगा जल, शिव अभिषेक का मिलेगा विशेष फल।

    HighLights

    1. सावन में काशी के घाटों से शिव अभिषेक जल का महत्व।

    2. आदिकेशव, दशाश्वमेध, अस्सी घाट जल लेने के लिए प्रमुख।

    3. गंगा का पवित्र जल ही अभिषेक के लिए सबसे महत्वपूर्ण।

    जागरण संवाददाता वाराणसी। रानी पद्मावती तारा योगतन्त्र आदर्श सांस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश झा के अनुसार, सावन माह में काशी में गंगा के किनारे से जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा अत्यंत महत्वपूर्ण है। काशी को मोक्षदायिनी गंगा का स्थान माना गया है और भगवान शिव इस क्षेत्र के अधिष्ठाता देवता हैं। इसलिए, काशी में जल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करने की परंपरा प्रचलित है।

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    काशी में जल लेने के लिए कुछ विशेष घाटों को महत्वपूर्ण माना गया है। इनमें से प्रमुख घाट निम्नलिखित हैं:

    (1) आद‍िकेशव घाट: यह घाट गंगा और वरुणा के संगम पर स्थित है। इसे काशी का उत्तर द्वार माना जाता है और इसे काशीखण्ड में विशेष महिमा प्राप्त है। कई विद्वान इसे काशी का प्रारंभिक तीर्थ मानते हैं।

    (2) दशाश्वमेध घाट: यह काशी का सबसे प्रसिद्ध घाट है। मान्यता है कि यहाँ ब्रह्माजी ने दस अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किए थे। आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ से जल लेकर भगवान शिव के अभिषेक के लिए जाते हैं।

    (3) अस्सी घाट: यह घाट साधना, तपस्या और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र है। इसे दक्षिण काशी का प्रवेशद्वार माना जाता है।

    (4) पंचगांगा घाट: यह घाट पांच पवित्र नदियों का प्रतीक है और इसे अत्यंत प्राचीन माना जाता है। यहां से जल लेकर अभिषेक करने की परंपरा भी है।

    (5) राजघाट एवं अन्य घाट: कई स्थानीय श्रद्धालु अपने कुलाचार या गुरु परंपरा के अनुसार अन्य घाटों से भी जल लेते हैं।

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    यह ध्यान देने योग्य है कि शास्त्रों में किसी एक घाट को अनिवार्य नहीं बताया गया है, बल्कि गंगा का पवित्र जल ही प्रमुख है। भगवान श्री काशी विश्वनाथ का स्थान सर्वोच्च है, फिर भी काशी में अनेक प्राचीन नदियों का उल्लेख मिलता है। काशीखण्ड में काशी के असंख्य नदियों का उल्लेख किया गया है। यह भावना बार-बार आती है कि काशी का प्रत्येक नदियों का स्वरूप शिवतत्त्व का है। इसलिए किसी भी नदियों में श्रद्धापूर्वक जल अभिषेक करना पुण्यदायक माना जाता है।

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    सावन माह में काशी में जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव भी है। श्रद्धालु अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस अवसर का लाभ उठाते हैं। काशी की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

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    सावन माह में काशी के विभिन्न घाटों से जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करना न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। श्रद्धालुओं को इस अवसर का लाभ उठाकर अपने जीवन में सकारात्मकता लाने का एक अनूठा अवसर मिलता है। सावन इसी माह के आख‍िर में 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। 

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