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वाराणसी में लाखों खर्च कर ऐसी गली बनाई कि बाढ़ आते ही विकास भी पानी में उतर गया!

By Vns Arun Mishra Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 04 Sep 2026 06:23 PM (IST)

वाराणसी के वार्ड 43 में लाखों रुपये खर्च कर बनी गलियां और रिटेनिंग वॉल बाढ़ में डूब गईं, जिससे विकास ...और पढ़ें

वाराणसी में लाखों खर्च के बाद भी बाढ़ में डूबी सड़कें, विकास की गुणवत्ता पर उठे सवाल।

वाराणसी में लाखों खर्च के बाद भी बाढ़ में डूबी सड़कें, विकास की गुणवत्ता पर उठे सवाल।

HighLights

  1. वार्ड 43 में 31 लाख से अधिक की लागत से गलियां बनीं।

  2. बाढ़ आते ही ये गलियां पानी में डूब जाती हैं, विकास पर सवाल।

  3. स्थानीय लोग निर्माण की गुणवत्ता और योजना पर प्रश्न उठा रहे हैं।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च हुए, शिलान्यास के पत्थर लगे, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम चमके, लेकिन बाढ़ का पानी बढ़ते ही विकास की पूरी तस्वीर पानी में उतर गई। वार्ड नंबर 43 में वर्ष 2021 में चौदहवें वित्त आयोग से दो स्थानों पर गली निर्माण और रिटेनिंग वाल के काम कराए गए।

दोनों कार्यों की अनुमानित लागत मिलाकर करीब 31.64 लाख रुपये थी। दस्तावेजों के मुताबिक प्यारे लाल मौर्य के प्लाट से रामबली मौर्य, विजय पटवा के मकान होते हुए रमेश राजभर के मकान तक गली निर्माण व रिटेनिंग वाल के लिए 17.65 लाख रुपये तथा कोनियों में सुनील पांडेय के प्लाट से सोमनाथ मौर्य के प्लाट तक गली निर्माण व रिटेनिंग वाल के लिए करीब 13.98 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई थी। दोनों कार्यों का शिलान्यास 31 अगस्त 2021 को हुआ।

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लेकिन सवाल यह है कि जब लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी बाढ़ में वही रास्ते डूब जाएं, तो आखिर विकास किसके लिए और किस ऊंचाई पर किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि रास्ता बनाना ही था तो उसे जमीन से कम से कम तीन फीट ऊंचा बना देते। इससे दो फायदे होते एक, सरकारी धन से बना रास्ता बाढ़ में तैरता नजर नहीं आता और दूसरा, लोगों को हर साल अपने ही मोहल्ले में नाव या पानी के बीच से रास्ता तलाशने की नौबत नहीं आती।

लोगों का कहना है कि शिलान्यास के समय विकास जमीन पर दिखाई दिया था, अब बाढ़ के समय वही विकास पानी के नीचे दिखाई दे रहा है। करीब 31 लाख रुपये से ज्यादा खर्च होने के बाद भी यदि लोगों को घर से निकलने के लिए पानी का स्तर नापना पड़े, तो सवाल सिर्फ जलभराव का नहीं, बल्कि निर्माण की योजना, गुणवत्ता और जरूरत के मुताबिक डिजाइन पर भी खड़ा होता है। विडंबना देखिए, सरकारी कागजों में गली का निर्माण हो चुका है, लेकिन बाढ़ के पानी में फंसे लोगों के लिए आज भी रास्ता अधूरा है।

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