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गंगा में बाढ़ की वजह से महाश्‍मशान मण‍िकर्ण‍िका और हर‍िश्‍चंद्र घाट पर अंत‍िम संस्‍कार के ल‍िए गल‍ियों में लगी शवों की कतार

By Pradyuman Pandey RamuEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 31 Aug 2026 12:14 PM (IST)

वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जो चेतावनी बिंदु के करीब है। इससे मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट ...और पढ़ें

HighLights

  1. गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचा।

  2. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार प्रभावित।

  3. शवों के दाह संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग, राजघाट के अनुसार सोमवार की सुबह 8 बजे जलस्तर 69.90 मीटर दर्ज किया गया, जो 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 71.262 मीटर है।

उल्लेखनीय है कि 1978 में गंगा का जलस्तर 73.901 मीटर तक पहुंचा था, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। वर्तमान जलस्तर चेतावनी बिंदु से मात्र 36 सेमी नीचे है, जिससे घाटों के संपर्क मार्ग डूबने के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति को देखते हुए एनडीआरएफ और जल पुलिस अलर्ट पर हैं और लगातार निगरानी की जा रही है।

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गंगा में बाढ़ के कारण महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट का बड़ा हिस्सा डूब चुका है। इस स्थिति में गलियों में चिताएं सजाई जा रही हैं, जबकि कुछ शवों को छत पर जलाया जा रहा है। दूर-दराज से शव लेकर आने वाले लोगों को अब अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे शव को गलियों में रखकर चिता स्थल खाली होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

जहां पहले कुछ घंटों में शव दाह हो जाता था, वहीं अब पूरा दिन लग रहा है। बाढ़ का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है, और यदि यह स्थिति कुछ समय और बनी रही, तो गलियों में चिताओं को जलाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। घाट पर सुविधाओं की भी कमी हो गई है, जिससे दूर-दराज से आने वाले लोग बाढ़ और बारिश के कारण शवदाह करने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।

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यह माना जा रहा है कि यह दुश्वारी अगले कुछ दिनों तक और भी बनी रह सकती है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटा जा सके। गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण स्थानीय निवासियों में चिंता का माहौल है।

घाटों के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ के पानी के बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। बाढ़ के कारण होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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इस समय वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से न केवल धार्मिक गतिविधियों पर असर पड़ा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को नुकसान हो रहा है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

गंगा में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें। जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है, और जैसे ही स्थिति में सुधार होगा, आवश्यक जानकारी साझा की जाएगी।

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