वाराणसी में संकट मोचन संगीत समारोह आज से, 135 कलाकार देंगे मनमोहक प्रस्तुतियां
वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में 6 अप्रैल से 103वां संगीत समारोह शुरू हो रहा है। यह छह दिवसीय आयोजन 135 से अधिक कलाकारों की 45 प्रस्तुतियां पेश करेगा। इ ...और पढ़ें

संकट मोचन मंदिर। जागरण
HighLights
6 अप्रैल से शुरू होगा 6 दिवसीय संगीत समारोह।
135 से अधिक कलाकार देंगे 45 प्रस्तुतियां।
11 पद्म सम्मानित और 14 मुस्लिम कलाकार शामिल।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। श्रीहनुमान लला की अंगनाई में छह अप्रैल से संगीत का 103वां महाकुंभ आरंभ होने जा रहा है। संगीत साधकों का तीर्थ कहे जाने वाले संकट मोचन मंदिर में आयोजित संगीत समारोह छह दिनों तक चलेगा। इसमें 135 से अधिक कलाकार अपनी संगीत कला का प्रदर्शन करती 45 प्रस्तुतियां देंगे।
विशेष यह कि समारोह में ऊर्जा व अनुभव का समन्वय भी दिखेगा। कारण, प्रस्तोताओं में 11 पद्म सम्मानित कलाकार हैं तो इस बार 21 नवप्रवेशी कलाकारों को भी मंच दिया जा रहा है। इसमें देश के सभी संगीत घरानों और सभी धर्म, पंथों, मजहबों के कलाकार संकट मोचन श्रीहनुमानजी के दरबार में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें पहली बार 14 मुस्लिम कलाकार होंगे।
संकट मोचन मंदिर में वैसे तो राग-भोग सेवा की परंपरा गोस्वामी तुलसीदास के समय से है, लेकिन वर्ष 1923 से प्रतिवर्ष हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में व्यवस्थित रूप से संगीत समारोह आयोजित किया जा रहा है। प्रत्येक दिन सांगीतिक कार्यक्रम सायंकालीन आरती के बाद 7:30 बजे से आरंभ होगा और प्रातः कालीन आरती तक या उसके बाद तक चलता है।
समारोह का शुभारंभ इस बार ‘रूपवाणी’ संस्था के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य नाटिका ‘चित्रकूट’ की प्रस्तुति से होगा। इसका निर्देशन ख्यात रंगकर्मी व साहित्यकार व्योमेश शुक्ल करेंगे। इसके पश्चात पंडित राहुल शर्मा संतूर वादन और पद्मश्री मालिनी अवस्थी का गायन होगा।
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दूसरे दिन ग्रैमी पुरस्कार विजेता पद्मश्री पंडित विश्वमोहन भट्ट की मोहनवीणा, पं. सुनील भट्ट की सात्विक वीणा का वादन होगा। पं. रामकुमार मिश्र का तबला वादन, उस्ताद गुलाम अब्बास खान का गायन, उस्ताद अकरम खान का तबला वादन होगा।
तीसरे दिन पंडित उल्हास कसालकर का गायन, विवेक सुनार का बांसुरी वादन, पद्मश्री जसपिंदर नरूला का गायन, पं. देवाशीष भट्टाचार्य का गिटार वादन, पं. आलोक लाहिड़ी का सरोद वादन होगा। चौथे दिन पं. यू राजेश का मैंडोलिन वादन और पद्मश्री अनूप जलोटा का गायन विशेष आकर्षण होगा।
पंचम निशा में पद्मश्री पं. शंभू महाराज के पुत्र व शिष्य पं. राम मोहन महाराज का कथक, पद्मश्री देवेंद्र नारायण मजूमदार का सरोद वादन, पद्मश्री रोनू मजूमदार का बांसुरी वादन और पद्मश्री कंकणा बनर्जी का तथा उस्ताद मसकुर अली खान का गायन व बिलाल खान का तबला वादन होगा।
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अंतिम दिन छठवें निशा में 11 अप्रैल को पं. रतिकांत महापात्रा और उनकी धर्मपत्नी सुजाता महापात्र ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगे। महताब अली नियाजी का सितार वादन, कलापिनी कोमकली का गायन, सिराज अली खान का सरोद वादन, पंडित अभय रुस्तम सपोरी का शततंत्री वीणा वादन, पंडित अंजू सहाय का तबला वादन होगा।
पं. विनोद लेने का तबला वादन, उस्ताद शाकिर खान का सितार वादन होगा और अंत में पद्मभूषण पं. साजन मिश्र पुत्र स्वरांश मिश्र के साथ युगल गायन करेंगे।