वाराणसी में जानलेवा बनता जा रहा तंबाकू, छह साल में तीन गुना बढ़े मुख कैंसर के मरीज
वाराणसी में तंबाकू के सेवन से मुख कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले छह सालों में यह संख्या तीन गुना से अधिक बढ़कर 16,694 तक पहुंच गई है ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
मुख कैंसर के मामले छह साल में तीन गुना बढ़े।
तंबाकू में मौजूद रसायन डीएनए को गंभीर क्षति पहुंचाते हैं।
युवा पीढ़ी भी तंबाकू सेवन से गंभीर रूप से प्रभावित।
शिवम सिंह, वाराणसी। तंबाकू जानलेवा साबित हो रहा है। गुटखा, खैनी, जर्दा, सिगरेट या पान मसाला, हर रूप में यह स्वास्थ्य को चोट पहुंचा रहा है। मुख कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। टाटा मेमोरियल सेंटर, बीएचयू, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल और मंडलीय अस्पताल के आंकड़े देखें तो वर्ष 2020 में अस्पतालों में मुख कैंसर के करीब 5,580 नए मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 16,694 के पार पहुंच गई है। इस तरह छह साल में तीन गुना से ज्यादा मरीज बढ़े हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुना है।
चेस्ट रोग विशेषज्ञ डा. अरुण यादव के मुताबिक तंबाकू के सेवन से फेफड़ों के कैंसर और टीबी मरीजों की संख्या बढ़ी है। बनारसी पान में चूना, कत्था और इलायची-सुपारी का मिश्रण होता था, लेकिन अब बाजार में पान के साथ तंबाकू परोसा जा रहा है, जो खतरनाक है।गोदौलिया के दुकानदार सुरेश का कहना है कि ग्राहक अब बिना तंबाकू वाला पान कम मांगते हैं। युवा पीढ़ी भी इसकी चपेट में आ रही है।
कार्सिनोजेनिक कंपाउंड डीएनए को पहुंचाते क्षति
मंडलीय चिकित्सालय के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. शशि भूषण उपाध्याय ने बताया कि तंबाकू में मौजूद नाइट्रोसामाइन जैसे कार्सिनोजेनिक कंपाउंड डीएनए को क्षति पहुंचाते हैं, जिससे मुख, जीभ, गले और फेफड़ों का कैंसर होता है। लगभग 70 प्रतिशत से अधिक मुख कैंसर के की वजह तंबाकू ही मिलता है।
केस-एक
लंका में पिछले 25 वर्षों से एक मरीज रोजाना 8-10 पान खाता था, जिनमें तंबाकू (जर्दा व खैनी) मिला होता था। सुबह उठते ही पहला पान और रात को सोने से पहले आखिरी पान उनकी आदत बन चुकी थी। वर्ष 2023 में उन्होंने मुंह में एक छोटा सा सफेद पैच (लेकोप्लाकिया) नोटिस किया, लेकिन इसे सामान्य जख्म समझकर नजरअंदाज कर दिया। बीएचयू कैंसर विभाग में जांच कराई गई। रिपोर्ट में स्टेज-2 मुख कैंसर (बुक्कल म्यूकोसा) की पुष्टि हुई। अब कीमोथेरेपी और रेडिएशन का इलाज चल रहा है।
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केस-दो
एक ड्राइवर पिछले 18 वर्ष की उम्र से गुटखा और पान मसाला का सेवन कर रहा था। दिन में 12-15 पाउच गुटखा खाना उनकी आदत थी।2024 के अंत में उनके मुंह में लगातार अल्सर (घाव) होने लगे, वजन तेजी से घटा और निगलने में बहुत दर्द होने लगा। महामना अस्पताल में बायोप्सी कराई गई तो स्टेज-3 जीभ का कैंसर निकला। अब सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी चल रही है।
युवाओं से अपील है कि वे तंबाकू का किसी भी तरह से सेवन न करें। यह जानलेवा है। तंबाकू मुक्त भारत का सकंल्प लें और लोगों को भी दिलाएं। नो टू टोबैको, येस टू हेल्दी लाइफ यह सिर्फ नारा नहीं, जीवनशैली है।
-डा. एनडी शर्मा, अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण।
नशामुक्ति अभियान के तहत बाल कल्याण अधिकारी, मिशन शक्ति टीम, एएचटीयू और सीएमओ आफिस की टीम द्वारा सामूहिक अभियान चलाकर लगभग 50 विद्यालयों के आसपास की दुकानों का चालान किया गया। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मादक पदार्थ न बेचने के लिए दुकानदारों को हिदायत दी गई।
- डा. सौरभ प्रताप सिंह, जिला सलाहकार सीएमओ कार्यालय वाराणसी।