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    वाराणसी में आगजनी और तोड़फोड़ के 21 साल पुराने मामले में आया फैसला, भाजपा प्रदेश मंत्री समेत 14 बरी

    Updated: Thu, 04 Jun 2026 03:22 AM (IST)

    वाराणसी में 21 साल पुराने उपद्रव, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में भाजपा प्रदेश मंत्री शंकर गिरि समेत 14 आरोपितों को अदालत ने बरी कर दिया है। यह मामला म ...और पढ़ें

    आगजनी व तोड़फोड़ के 21 साल पुराने मामले में भाजपा प्रदेश मंत्री समेत 14 दोषमुक्त।

    आगजनी व तोड़फोड़ के 21 साल पुराने मामले में भाजपा प्रदेश मंत्री समेत 14 दोषमुक्त।

    HighLights

    1. 21 साल पुराने वाराणसी उपद्रव मामले में फैसला आया।

    2. भाजपा प्रदेश मंत्री शंकर गिरि समेत 14 आरोपित बरी हुए।

    3. मुफ्ती नोमानी की जांच पर हुए विवाद से जुड़ा था।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। नमाज के लिए जा रहे मुफ्ती ए बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी की जांच को लेकर हुए उपद्रव ,तोड़फोड़, आगजनी के 21 साल पुराने मामले में भाजपा के प्रदेश मंत्री शंकर गिरि, सामाजिक कार्यकर्ता गुलशन कपूर, महंत राजेंद्र तिवारी उर्फ बबलू समेत 14 आरोपितों को अदालत से राहत मिल गई है।

    विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने इन आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बुधवार को दोषमुक्त कर दिया।

    दोषमुक्त आरोपितों में शिवसेना नेता अजय चौबे, मो.एजाज, सलीम, इरफान, शेर अली, गुरशेर अली, शमशेर अली, बच्चा मुसलमान उर्फ बच्चा, जब्बार मियां मंसूरी, भानू मिश्रा उर्फ संजीव रत्न मिश्र व जुगनू भी हैं। अदालत में आरोपितों की ओर से वकील श्रीनाथ त्रिपाठी, गुलाम खान व आसिफ उमर ने पैरवी की।

    अभियोजन का आरोप था कि दो सितंबर 2005 की दोपहर डेढ़ बजे जुमा की नमाज के लिए नमाजी और हिंदू वर्ग के दर्शनार्थी छत्ताद्वार से ज्ञानवापी परिसर में जा रहे थे। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सभी की जांच करके अंदर जाने दे रहे थे। उसी समय मौलाना अब्दुल बातिन छत्ताद्वार पहुंचे।

    सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जांच की तो उनके पीछे खड़े नमाजी उत्तेजित होकर पुलिसकर्मियों से विवाद करने लगे और पुलिस व प्रशासन विरोधी नारेबाजी करने लगे। मौलाना सड़क किनारे एक दुकान पर बैठ गए।

    विवाद बढ़ने पर प्रभारी जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक नगर पहुंचे। दोनों अधिकारियों के पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देने पर मौलाना बातिन नमाज पढ़ने गए।

    नमाज समाप्त होने के बाद कुछ लोगों के साथ मौलाना बातिन वापस चले गए। उनके जाने के बाद मोहम्मद एजाज अहमद, मुंशी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद सलीम, जहांगीर कादरी एवं अन्य के नेतृत्व में मुस्लिम वर्ग के लगभग चार हजार लोग नारेबाजी करते हुए ज्ञानवापी क्रांसिग पर आ गए। पुलिस पोस्ट एवं उसमें लगे उपकरणों को तोड़ने लगे। उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव भी किया और मोटरसाइकिल में आग लगा दी।

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    इसी दौरान व्यापारी नेता शंकर गिरि, महंत राजेंद्र तिवारी, गुलशन कपूर एवं अन्य छत्ताद्वार पर आकर उत्तेजक नारे लगाने लगे और उपद्रवी भीड़ को तोड़फोड़ के लिए उकसाने लगे। इस हमले में चौक व दशाश्वमेध इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मियों को चोटें आई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

    अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मौके पर मौजूद रहे दो पुलिसकर्मियों को गवाही के लिए पेश किया गया। दोनों ने आरोपितों के हमले में शामिल होने की पुष्टि नहीं की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपितों शिव सेठ व जहांगीर कादरी की मृत्यु हो गई।

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