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    उत्तराखंड: अमेरिका और जापान तक पहुंच रही अल्मोड़ा की हर्बल चाय और हस्तशिल्प

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 07:25 PM (IST)

    अल्मोड़ा के पारंपरिक पहाड़ी उत्पाद जैसे हर्बल चाय और हस्तनिर्मित वस्त्र अब अमेरिका, जापान सहित कई देशों में निर्यात हो रहे हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. अल्मोड़ा के पारंपरिक उत्पाद अब वैश्विक बाजार में लोकप्रिय

    2. हर्बल चाय, हस्तशिल्प अमेरिका, जापान सहित कई देशों में निर्यात

    3. स्थानीय उद्यमियों को डाकघर निर्यात केंद्र से मिली मदद

    हेमंत बिष्ट, अल्मोड़ा। अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में तैयार होने वाले पारंपरिक पहाड़ी उत्पाद अब वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

    स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार की जा रही हर्बल चाय, प्राकृतिक रेशों से बने वस्त्र और हस्तनिर्मित उत्पाद अमेरिका, हॉलैंड, तुर्की, जापान, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और मलेशिया समेत कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।

    विदेशी बाजारों में बढ़ती मांग ने स्थानीय कारीगरों और महिलाओं के लिए रोजगार व आय के नए अवसर भी पैदा किए हैं।

    विदेशी ग्राहकों में काफल और बिच्छू घास (नेटल) से तैयार हर्बल चाय की सबसे अधिक मांग है। वहीं भीमल और बिच्छू घास के प्राकृतिक रेशों से तैयार शॉल, स्टोल, स्कार्फ, कपड़े और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद भी अपनी गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूलता के कारण पसंद किए जा रहे हैं।

    डाकघर निर्यात केंद्र से मिली नई राह

    पहले स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पाद दिल्ली जैसे महानगरों में मौजूद एजेंटों के माध्यम से विदेश भेजने पड़ते थे। डाक अधीक्षक जेएस बोरा ने बतया कि अब डाकघर निर्यात केंद्र की सुविधा मिलने से वे सीधे अल्मोड़ा से ही एक से 35 किलोग्राम तक के पार्सल विदेश भेज रहे हैं।

    इससे समय और लागत दोनों में कमी आई है। साथ ही पहाड़ के पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का रास्ता भी आसान हुआ है।

    द हिमालयन वीवर्स के उत्पादों की विदेशों में मांग

    स्थानीय संस्था द हिमालयन वीवर्स के उद्यमी मेरिनो ऊन, पश्मीना, सूती, बांस, बिच्छू घास और मिश्रित ऊन से शॉल, स्टोल, स्कार्फ तथा विभिन्न प्रकार के वस्त्र तैयार करती है।

    इसके अलावा कैप, शिशुओं के बूटीज़, स्वेटर, बैग और ऐपण कला से सुसज्जित कुमाऊँनी टोपियां भी बनाई जाती हैं।

    इन उत्पादों का निर्यात अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्ज़रलैंड में किया जा रहा है। संस्था को इससे प्रतिवर्ष लगभग 10 से 12 लाख रुपये का कारोबार प्राप्त कर रहे हैं।

    बाबा एग्रोटेक ने महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

    धौरा गांव स्थित ग्रामीण स्टार्टअप बाबा एग्रोटेक के संस्थापक कमल पांडे व सह-संस्थापक नमिता टम्टा महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने का कार्य कर रही हैं।

    उन्होंने बताया कि संस्था अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और मलेशिया में हिमालयी उत्पादों का निर्यात कर रही है। इसका वार्षिक कारोबार लगभग 45 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।

    कुमाऊं खंड ने बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

    कसार देवी स्थित कुमाऊं खंड संस्था के संस्थापक पवित्र जोशी जलवायु-अनुकूल हिमालयी औद्योगिक भांग (हैंप) की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला पर कार्य कर रहे है।

    उन्होंने बताया कि दो हजार से अधिक महिला लघु कृषकों के सहयोग से खाद्य, वेलनेस और टेक्सटाइल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों का निर्यात तुर्की, जापान, थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम में किया जा रहा है। संस्था अब तक लगभग तीन करोड़ रुपये का कारोबार कर चुकी है।

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    निर्यात से जुड़ी सुविधाओं और सरकारी सहयोग का दायरा बढ़ाया जाए तो अल्मोड़ा सहित पूरे कुमाऊं के पारंपरिक उत्पाद वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बना सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और पलायन पर भी प्रभावी अंकुश लग सकेगा। लगातार इस पर कार्य हो रहा है।
    अंशुल सिंह, जिलाधिकारी, अल्मोड़ा

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