विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चीन में कड़े पहरे व सीसीटीवी की निगरानी में पूरी हुई कैलास मानसरोवर यात्रा, परिक्रमा को देने पड़ते हैं 48280 रुपए

Published: Thu, 27 Aug 2026 10:29 AM (IST)

कैलास मानसरोवर यात्रा का 10वां दल अल्मोड़ा लौटा, इस वर्ष कुल 450 तीर्थयात्रियों ने यात्रा की। चीन में कड़ी निगरानी ...और पढ़ें

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

चंद्रशेखर द्विवेदी, अल्मोड़ा। कैलास पर्वत की दिव्यता, मानसरोवर की आस्था और मोक्ष की अनुभूति को समेटे कैलास मानसरोवर की कठिन यात्रा पूरी कर तीर्थयात्रियों का 10वां दल बुधवार को अल्मोड़ा पहुंचा। इस वर्ष 10 दलों में कुल 450 तीर्थयात्रियों ने कैलास मानसरोवर की यात्रा की।

तीर्थयात्रियों को यात्रा के दौरान मिले आध्यात्मिक अनुभवों के साथ ही चीनी क्षेत्र में यात्रा की कठिनाइयों और व्यवस्थाओं की जानकारी साझा की। चीन क्षेत्र में पवित्र यात्रा चीनी सैनिकों के कड़े पहरे और सीसीटीवी की निगरानी में होती है। तीर्थयात्रियों को कुछ पड़ावों पर शौचालय की दिक्कतें भी सामने आई।

बुधवार की सुबह कैलास मानसरोवर यात्रियों का आखिरी 10वां दल दिल्ली को रवाना हुआ। इस दल में में 28 पुरुष और 16 महिलाएं शामिल थीं। पर्यटन आवास गृह से निकलते हुए तीर्थयात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। यात्रियों ने कहा कि चीनी क्षेत्र में थोड़ी दिक्कत आई।

यम द्वार से पैदल कैलास परिक्रमा के दौरान पड़ाव डेरापुक, जुतुलपुक में टायलेट की व्यवस्था ठीक नहीं थी। यात्रा मार्ग के अलावा आप कहीं दूसरी जगह नहीं जा सकते थे। चीनी पुलिस हमेशा आपके साथ रहती थी। दल के लाइजिनिंग अधिकारी अर्जुन प्रधान ने बताया कि भारतीय क्षेत्र में व्यवस्थाएं काफी अच्छी थी। कैलास मानसरोवर इतनी ऊंचाई पर स्थित है यात्रा दुर्गम पड़ावों से होकर होती है तो आक्सीजन आदि की दिक्कतें होना स्वभाविक है।

परिक्रमा को देने पड़ते है 48280 रुपए

तीर्थ यात्रियों को 52 किमी कैलाश परिक्रमा के लिए तिब्बती पोनी पोटर्स को प्रति यात्री 3400 युआन भारतीय रुपए में 48280 रुपए देने पड़े। यम द्वार से आगे कैलाश परिक्रमा पैदल होती है। कुछ को छाेड़ यहां से आगे तीर्थयात्री पोनी पोटर्स का सहारा लेते हैं।

यह भी पढ़ें- कैलास मानसरोवर यात्रा: 10वां दल पहुंचा चौकोड़ी, शिवभक्तों ने साझा किए तिब्बत में दर्शन के अद्भुत अनुभव

कैलास पर्वत के चरण स्पर्श करना प्रतिबंध

डेरापुक से करीब डेढ़ किमी आगे कैलास पर्वत की जड़ मानी जाती है। पहले तीर्थयात्री यहां तक जाकर कैलास के चरण स्पर्श करते थे। अब यात्रियों को निर्धारित सीमा तक ही जाने की अनुमति है। नियम तोड़ने पर जुर्माने का प्रावधान है। पूरे यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। तकलाकोट में सीमित क्षेत्र में घूमने की अनुमति है, जबकि इसके बाद यात्री निर्धारित मार्ग से ही चल सकते हैं। चीनी पुलिस की निगरानी लगातार बनी रहती है।

कैलास मानसरोवर के लिए करनी होती है 1719 किमी की यात्रा

तीर्थयात्रियों को नई दिल्ली से कैलास तक और वापस नई दिल्ली लौटने में करीब 1719 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसमें यात्रा का बड़ा हिस्सा भारत में तय होता है। नई दिल्ली से टनकपुर, धारचूला, गुंजी और नाभीढांग होते हुए लिपुलेख तक करीब 664 किमी का सफर तय किया जाता है। चीन की सीमा में प्रवेश के बाद पुरांग, तरचिन, झिरेपु, जुंझुई पु और चुगु होते हुए कैलाश परिक्रमा की जाती है। तिब्बत क्षेत्र में आने-जाने की कुल दूरी करीब 317 किमी है।

लिपुलेख से भारत लौटने के बाद नाभीढांग, बूंदी, चौकोड़ी और अल्मोड़ा होते हुए नई दिल्ली तक करीब 738 किमी की दूरी तय होती है। इस तरह पूरे रूट में भारत की दूरी करीब 1402 किमी, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में करीब 317 किमी है। 22 दिनों की की यात्रा में 14 दिन भारत व 8 दिन तीर्थयात्री चीन में रहते है।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में आज कैसा रहेगा मौसम? कैलास मानसरोवर मार्ग बंद, बदरीनाथ धाम यात्रा रोकी