पद्मश्री साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन, पैतृक गांव खंतोली में शोक की लहर
प्रख्यात हिंदी साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत का 90 वर्ष की आयु में भोपाल में निधन हो गया। ...और पढ़ें

कैलाश चंद्र पंत
HighLights
प्रख्यात हिंदी साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन।
90 वर्ष की आयु में भोपाल में ली अंतिम सांस।
पद्मश्री से सम्मानित, पैतृक गांव खंतोली में शोक।
जागरण संवाददाता, बागेश्वर। प्रख्यात हिंदी साहित्यकार, वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को भोपाल में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही कांडा तहसील के विजयपुर क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव खंतोली में शोक की लहर दौड़ गई।
कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उनका मूल पैतृक संबंध बागेश्वर जिले के खंतोली गांव से था। गांव में आज भी उनके परिवार और बिरादरी के लोग निवास करते हैं। स्वजन ने बताया कि वह कुछ वर्ष पूर्व अपने पैतृक गांव आए थे और परिजनों व ग्रामीणों से मुलाकात कर पुराने दिनों की यादें साझा की थीं।
हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक गतिविधियों में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। उन्होंने 'जनधर्म' साप्ताहिक और 'अक्षरा' त्रैमासिक पत्रिका का संपादन किया। लंबे समय तक भोपाल स्थित मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के महासचिव के रूप में हिंदी की सेवा की। साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
उनके निधन पर खंतोली गांव के विनोद पंत, कमलकांत पंत, महेश पंत समेत अनेक ग्रामीणों ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें कैलाश चंद्र पंत के निधन की जानकारी दैनिक जागरण के माध्यम से मिली।
किशोर पंत ने कहा कि उनके निधन से पूरे परिवार और बिरादरी में शोक की लहर है। उन्होंने इसे हिंदी साहित्य, पत्रकारिता और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।