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    बदरीनाथ चढ़ावा चोरी: प्रमोद नौटियाल ने कबूला जुर्म, एसआईटी को डीवीआर रिकवरी का इंतजार

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 12:06 PM (IST)

    बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की चोरी के मामले में एसआईटी को सीसीटीवी डीवीआर की रिकवरी का इंतजार है, जिसे फोरेंसिक लैब भेजा गया है। ...और पढ़ें

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    संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी को अब सीसीसीटी कैमरों की डीवीआर के रिकवर होने का इंतजार है। डीवीआर को देहरादून स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है।

    वहीं, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। कमिश्नर ने अब बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के दो लेखाकर्मी और तोसाखना (कोषागार) से जुड़े कार्मिकों को पूछताछ के लिए बुलाया है।

    रिमांड के दौरान मुख्य आरोपित वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल ने एसआईटी के सामने दान-चढ़ावे से चोरी की बात स्वीकारी थी। अब एसआईटी उसके बैंक खातों के साथ जमीन की खरीद-फरोख्त के रिकार्ड की भी जांच कर रही है। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि चढ़ावा चोरी में अन्य कार्मिकों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। जल्द सब-कुछ सामने आ जाएगा।

    बताया कि इस वर्ष के दान-चढ़ावे के रिकार्ड से खजाने का मिलान किया जा चुका है और अब पिछले वर्षों के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने डीवीआर के जल्द रिकवर होने की उम्मीद जताई। बता दें कि बीकेटीसी ने एसआईटी को 13 दिन की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराई है, बाकी 32 दिन की फुटेज गायब है। जबकि, बीकेटीसी ने 45 दिन की फुटेज सुरक्षित होने का दावा किया था, हालांकि बाद में कहा गया कि तकनीकी कारणों से फुटेज गायब हो गई।

    गड़बड़ी के लिए नौटियाल जिम्मेदार

    गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने प्रभारी मंदिर अधिकारी व वीआइपी प्रोटोकाल के जुड़े तीन कार्मिकों के बयान दर्ज किए हैं। सूत्रों के अनुसार वीआइपी प्रोटोकाल से जुड़े तीनों कार्मिकों ने प्रोटोकाल में अनियमितता के लिए नौटियाल को जिम्मेदार ठहराया।

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    कहा कि नौटियाल के हस्ताक्षर से ही वीआइपी व वीवीआइपी प्रोटोकाल तय होता था और शुल्क भी उसी के निर्देश पर वसूला गया था। वहीं, कमिश्नर ने बीकेटीसी के दो लेखाकर्मी और तोसाखना से जुड़े कार्मिकों देहरादून तलब किया है। तोसाखना में ही पूजा प्रसाद, चंदन, दान के वस्त्र, केसर समेत अन्य सामग्री जमा रहती है। दान के वस्त्र बाद में श्रद्धालुओं को न्यूनतम दर पर प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं।

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