चमोली टनल हादसे का भयावह मंजर: धमाके के साथ आया भारी मलबा और सैलाब, जान बचाने को भागा हर कोई
टीएचडीसी की विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए हादसे में 22-25 श्रमिक काम कर रहे थे, तभी धमाके के साथ भारी मलबा और पानी आ गया। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
देवेंद्र रावत, गोपेश्वर। शाम करीब साढ़े छह से पौने सात बजे होंगे। टनल में 22 से 25 श्रमिकों की टीम काम कर रही थी। इसी बीच एक धमाका हुआ और पानी का स्रोत फूट पड़ा। इससे एकाएक भारी मात्रा में पानी और मलबा आ गया। इससे टनल में काम कर रहे सभी श्रमिकों में चीख पुकार मच गई।
हर कोई जान बचाने को भाग रहा था, लेकिन पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि कोई उसके नीचे दब गया तो कोई पानी के बहाव में बहने लगा। वहीं कुछ श्रमिक जो खुद को बचाने में सफल रहे फौरन साथियों की मदद को आगे आए और कुछ को मलबे के नीचे से निकाला और बाहर ले आए।
बम के धमाके जैसी थी आवाज
टीएचडीसी की 444 मेगावाट की निर्माणाधीन विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में हुए हादसे में घायल और प्रत्यक्षदर्शी निस्तरा भिंगरा निवासी पायरा किन्सु टोला, थाना तोरपा, जिला खूंटी, झारखंड ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उक्त घटना बतायी। उन्होंने बताया कि टनल में 1.8 किमी में ग्रेविटी प्वांइट में टनल को पैकिंग करने का कार्य चल रहा था, यहां पर सेटरिंग की गई थी।
अचानक तेज आवाज का धमाका हुआ और फिर भारी मात्रा में टनल के ऊपरी भाग से पानी के साथ मलबा आया। इससे पहले कि कोई संभल पाता सब इधर-उधर छिटक गए। वह पानी और मलबा में बहते हुए टनल के बाहरी ओर आ रहे थे, लेकिन इसी दौरान मलबे में भी धंस रहे थे। उन्होंने एक पाइप देखा और फिर उसे पकड़ लिया। इस दौरान देखा कि अन्य साथी भी मलबे में दबे हुए हैं और कुछ मलबे व पानी के साथ बह रहे हैं। अंदर सभी लोग चिल्ला रहे थे। उनके कमर, हाथ, पैरों में चोट आई है। हालांकि अब वह खतरे से बाहर हैं।
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जिला अस्पताल लाए गए सुनील दीवान निवासी जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़ हेल्पर पद पर एचसीसी कंपनी में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि जब मलबा व पानी बहा तो वह पानी के साथ बहते हुए टनल के बाहर तक आ गए। पानी इतनी तेजी से बह रहा था कि टनल के मुहाने तक पहुंच गया था। हालांकि फिर पानी का बहाव कम हुआ तो वह किसी तरह से किनारे आए।
जिला चिकित्सालय में भर्ती हाबिल गुडिया निवासी थाना तपकरा, जिला खूंटी, झारखंड ने बताया कि धमाके के साथ जब पानी का स्रोत फूटा और उसके साथ भूस्खलन का मलबा गिरा तो उन्हें साक्षात मौत नजर आई। हालांकि अब सभी घायल कर्मचारी भगवान का शुक्रिया कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले जोर की आवाज आई जो किसी बम के धमाके जैसी थी, फिर सब तितर-बितर हो गए। कोई मलबे के साथ दबा तो कोई पानी में बहता मिला। वह भी पानी के तेज बहाव में बहकर बाहर की ओर आ रहे थे। इसी दौरान उनके एक साथी ने उन्हें किनारे खींचा।
जिला गोपालगंज, बिहार के अवधेश पांडे ने बताया कि अंदर सेटरिंग का कार्य चल रहा था। इस दौरान दुर्घटना हो गई। वह दुर्घटना स्थल से कुछ दूरी पर थे, जिससे उन्हें चोट नहीं आई। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उन्होंने तत्काल साथियों को बचाने का काम शुरू किया। उन्होंने दलदल में फंसे साथी श्रमिकों को निकालने में मदद की। विनोद निवासी जिला गुमला झारखंड ने बताया कि पहली शिफ्ट में 22 से अधिक लोग कार्य कर रहे थे। हालांकि सभी लोग घटनास्थल पर नहीं थे। रात आठ बजे शिफ्ट चेंज होनी थी, लेकिन उससे पहले हादसा हो गया।