चार दिन से धधक रहे चमोली के जंगल, चारों ओर धुआं फैलने से जनजीवन प्रभावित
चमोली जिले के जंगल चार दिनों से धधक रहे हैं, जिससे नंदप्रयाग, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग सहित कई विकासखंड धुएं से घिरे हैं। ...और पढ़ें

नारायणबगड़ क्षेत्र में कुछ इस तरह धधक रहे हैं जंगल। साभार-जयवीर सिंह

समय कम है?
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संवाद सूत्र, कर्णप्रयाग (चमोली)। बीते चार दिनों से जनपद चमोली के जंगल जगह-जगह धधक रहे हैं। जनपद के नंदप्रयाग, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, सिमली और गैरसैंण विकासखंड के जंगलों में लगी आग से समूचा क्षेत्र धुएं की आगोश में है।
कर्णप्रयाग और नारायणबगड़ में वन कार्यालयों के समीप पसरी आग को काबू करने में फायर वाचरों और अधिकारियों के पसीने छूटे हुए हैं।
जंगलों में चीड़ के पेड़ों पर लगी आग को बुझाने में पुलिस प्रशासन और फायर टीम की मदद भी ली जा रही है।
नारायणबगड़ अंतर्गत नोपानी और झंगोर गाड़ के जंगल आग से राख हो गए हैं। यहां तीन दिनों से फैली आग से वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचा है।

कई जगहों पर विकराल हो चुकी आग पहाड़ की चोटियों तक पहुंच चुकी है, जहां पहुंचना फायर टीम के लिए भी संभव नहीं है। इसी तरह नंदप्रयाग, आदिबदरी, गैरसैंण के जंगलों में भी वनाग्नि से वन्य जीवों को नुकसान पहुंचा है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अराजकतत्वों द्वारा वनाग्नि की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, जिसका खामियाजा वन्य जीवों के साथ समीप बसासत लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
चीड़ के जंगलों में लगी आग से पूरे क्षेत्र में धुआं पसरा हुआ है और इससे श्वास से ग्रसित मरीजों के साथ सामान्य रूप से भी आंखों में जलन, गले में इंफेक्शन की शिकायत लेकर दूर-दराज क्षेत्र से मरीज अस्पतालों का रूख कर रहे हैं।
जंगलों में लगी आग से मंगलवार शाम चिंगारी ने अपर बाजार रानीखेत लिंक मोटर मार्ग पर एक आवासीय भवन के समीप चीड़ के शीर्ष पर एकाएक भयानक रूप ले लिया।
लेकिन समय पर कोतवाली कर्णप्रयाग के एसएचओ राकेश चंद्र भट्ट और फायर टीम की मदद से पेड़ पर लगी आग को बुझाया गया, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
वहीं, सिमली क्षेत्र से लगे जंगल चार दिनों से जल रहे हैं। इसी तरह कपीरीपट्टी के जंगलों में भी भड़की आग से वातावरण दूषित हो गया है और जैव विविधता को भी खासा नुकसान पहुंचा है।
चार दिनों से जंगलों में लगी आग ने वनों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। क्षेत्र के बसक्वाली, सिनखाल, केदारूखाल, मठोली, केलापाणी, बणसोली, बरमोली, कुनेथ, कोलाडुंग्री गांवों में भी वनों की आग से चारापत्ती को नुकसान पहुंचा है।
अराजकतत्वों द्वारा अकारण वनों को आग के हवाले किए जाने से रोकने के लिए वनकर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही वन पंचायत सरपंच और महिला मंगल दलों को भी वनाग्नि की सूचना देने को लेकर वार्तालाप किया गया है। अकारण वनों में लगी आग से समस्त क्षेत्र में धुआं फैल गया है और ऐसे अराजकतत्वों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
- सर्वेश कुमार दुबे, डीएफओ, बदरीनाथ
जंगलों में लगी आग के बाद अस्पतालों में वायरल से ग्रसित मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। वातावरण में धुआं अधिक मात्रा में फैल गया है। ऐसे में जलस्रोतों के दूषित होने और हवा सीधे फेफड़ों में पहुंचने से संक्रमण बढ़ रहा है। लोगों को मास्क का प्रयोग करने और पानी उबाल कर पीने की सलाह दी जा रही है।
- डा. बीपी पुरोहित, सीएमएस, उपजिला चिकित्सालय, कर्णप्रयाग
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