नंदा देवी राज जात: कुरूड़ में बड़ी जात के मुहूर्त की घोषणा, गौड़ ब्राह्मणों ने तय किया दिन
नंदा देवी राजजात के आयोजन पर समिति और कुरुड़ हक-हकूकधारियों में सहमति नहीं बनी। राजजात समिति ने 2027 में आयोजन की बात कही, जबकि कुरुड़ में बड़ी नंदा ज ...और पढ़ें

हकहकूकधारियों के सामने पूजा अर्चना के बाद मुहूर्त निकाला गया। File Photo
HighLights
कुरुड़ में बड़ी नंदा जात 5 सितंबर से शुरू होगी।
यात्रा 20 सितंबर को होमकुंड में पूर्णता प्राप्त करेगी।
राजजात समिति ने 2027 में आयोजन की बात कही।
संवाद सहयोगी, जागरण: कर्णप्रयाग (चमोली)। नंदा देवी राजजात के सर्वसम्मत आयोजन को लेकर नंदा देवी मंदिर कुरुड़ के हक-हकूकधारियों और नंदा देवी राजजात समिति में कोई सहमति नहीं बन पाई है।
समिति ने स्पष्ट किया है कि राजजात का आयोजन 2027 में ही होगा और अगले वर्ष वसंत पंचमी पर्व के दिन इसका दिनपट्टा जारी किया जाएगा।
जबकि, कुरुड़ में बड़ी नंदा जात आयोजन समिति ने इसी वर्ष पांच सितंबर से बड़ी नंदा जात निकालने की घोषणा कर दी है, जो नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू होगी और 20 सितंबर को होमकुंड में पूर्णता को प्राप्त करेगी। इसी के साथ समिति की ओर से बड़ी जात का कैलेंडर भी जारी कर दिया गया।
वसंत पंचमी पर कर्णप्रयाग के नौटी स्थित नंदा देवी मंदिर में राजजात आयोजन के मनौती (उच्याणा) पूजन के बाद तय हुआ कि इस वर्ष राजजात का आयोजन संभव नहीं है।
पंचांग गठना के बाद पं. एस कोठियाल ने बताया कि इस वर्ष 19 सितंबर तक यात्रा पूरा होने की तिथि निकल रही है। समिति के अध्यक्ष डा. राकेश कुंवर ने कहा कि वर्ष 2014 में यात्रा ने चार सितंबर को विराम ले लिया था, लेकिन इस बार मलमाल (अधिमास) के चलते तिथि 15 दिन आगे बढ़ गई है।
लिहाजा इस बार राजजात नहीं होगी। समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने भी इससे सहमति जताई। जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने अगले वर्ष यात्रा के आयोजन में समिति को प्रशासन स्तर पर पूरा हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
दूसरी ओर, नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ में बड़ी नंदा जात आयोजन समिति के अध्यक्ष हरेंद्र सिंह रावत व नंदा देवी के खड़कधारी थोकदार वीरेंद्र सिंह रावत समेत हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में पंचांग पूजा कर गौड़ ब्राह्मणों ने इसी वर्ष पांच सितंबर से बड़ी जात के आयोजन की घोषणा की।
नंदा देवी के पश्वा ने भी इस पर सहमति जताई। कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने कहा कि आस्था और परंपरा से जुड़ी बड़ी जात किसी भी परिस्थिति में नहीं रोकी जा सकती। कहा कि देव डोलियों का रूट मैप भी तैयार किया गया है। इसी के अनुरूप डोलियां होमकुंड तक जाएंगी।