देहरादून: 39 साल बाद कचटा में विराजे चालदा महासू देवता, जागड़ा पर्व में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
कालसी के कचटा मंदिर में इष्टदेव चालदा महासू देवता का बरांश यानि प्रवास जागड़ा पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस धार्मिक आयोजन में लगभग 25 हजार श्रद ...और पढ़ें

कचटा मंदिर में चालदा देवता के विराजमान होने के दौरान देर रात तक रही श्रद्धालुओं की भीड़। समिति

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संवाद सूत्र, कालसी (देहरादून)। इष्टदेव चालदा महासू देवता की स्तुति में मनाया जाने वाला बरांश यानि प्रवास जागड़ा पर्व कचटा स्थित भव्य मंदिर में पारंपरिक तरीके से मनाया गया।
लगभग 25 हजार श्रद्धालु इस धार्मिक पल के गवाह बने। सभी ने चालदा देवता के दर्शन कर मन्नतें मांगी और देव पालकियों को कंधा लगाकर पुण्य लाभ कमाया।
गुरुवार देर शाम जब चालदा देवता ने पालकी व देव चिह्नों के साथ नवनिर्मित मंदिर के गर्भ ग्रह में प्रवेश किया तो हजारों श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
परंपरा के अनुसार चालदा महासू को चलता राजा का दर्जा मिला है। इसके अनुसार चालदा देवता जौनसार के 18 खतों के मुख्य मंदिरों में समय-समय पर प्रवास पर जाते हैं।

इसी कड़ी में 39 साल बाद शैली खत के दोहा से प्रवास समाप्त कर देवता कचटा स्थिति भव्य मंदिर में विराजे।
जौनसार बावर क्षेत्र की खत लखवाड़, बहलाड़, कोरू, पंचगांव, सेली व फरटाड़, शीली, मझियारन, सिलगांव, उपलगांव, कोटा तपलाड के अलावा दर्शन करने वालों में टिहरी, उत्तरकाशी, जौनपुर रवाईं के विभिन्न गांवों से श्रद्धालु भी यहां पहुंचे।

इस मौके पर रुद्र सेना संस्थापक राकेश उत्तराखंडी, भाजपा नेता कमलेश भट्ट, डा. नीलम चौहान, सुरेंद्र चौहान, अर्जुन सिंह चौहान, इंदर सिंह भंडारी आदि उपस्थित रहे।
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