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    तीसरी शताब्दी में यहां हुआ था अश्वमेध यज्ञ, वर्तमान में हैं 3 वेदिकाएं; 73 वर्ष बाद फिर हो रही है खोदाई

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 03:56 PM (IST)

    देहरादून के जगतग्राम में अश्वमेध यज्ञ स्थल पर चौथी वेदिका की खोज के लिए 73 साल बाद फिर खोदाई शुरू हुई है। राजा शीलवर्मन द्वारा तीसरी शताब्दी में कराए ...और पढ़ें

    जगतग्राम बाढ़वाला में चौथी वेदिका का पता लगाने के लिए अश्वमेध स्थल की की गई खुदाई। जागरण

    जगतग्राम बाढ़वाला में चौथी वेदिका का पता लगाने के लिए अश्वमेध स्थल की की गई खुदाई। जागरण

    HighLights

    1. चौथी अश्वमेध यज्ञ वेदिका की खोज के लिए खोदाई शुरू।

    2. राजा शीलवर्मन ने तीसरी शताब्दी में कराए थे चार यज्ञ।

    3. खोदाई में जले कोयले, ईंटें और मिट्टी के बर्तन मिले।

    सवाद सूत्र, जागरण, कालसी (देहरादून) : जगतग्राम बाढ़वाला स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल के बारे में यज्ञ के दौरान चार वेदिकाओं का वर्णन मिलता है। लेकिन वर्तमान में यहां तीन ही वेदिकाएं हैं। चौथी वेदिका की खोज के लिए 73 साल बाद फिर खोदाई शुरू की गई है। खोदाई में मिले जले कोयले व ईंटों को पुरातत्व विभाग वेदिकाओं में प्रयोग की जाने वाली सामग्री मान रहा है। हालांकि, इन अवशेषों को टेस्टिंग के लिए लैब भेजा गया है। 

    चौथी वेदिका के महत्व को देखते हुए उसकी खोज के लिए शुक्रवार को भी विशेषज्ञों की देख-रेख में खोदाई का कार्य जारी रहा। हालांकि, अभी कुछ अवशेष ही मिले हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक अश्वमेध यज्ञ स्थल पर एक मीटर से नीचे की परतों में मिट्टी के बर्तनों के अलावा जले हुए कोयले के अवशेष मिले थे।

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    इस बीच गुरुवार को खोदाई के दौरान भी मिट्टी के बर्तनों के साथ-साथ ईंटों के भी अवशेष मिले। इस खोदाई का मुख्य उद्देश्य राजा शीलवर्मन की ओर से कराए गए चार अश्वमेध यज्ञ स्थलों की चौथी वेदिका को ढूंढना है, जिससे ऐतिहासिक स्थल का वैज्ञानिक व वास्तविक कालक्रम के बारे में पता लगाया जा सके।

    अश्वमेध यज्ञ स्थल के बारे में खोज के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से इससे पूर्व वर्ष 1953 से 54 तक खोदाई कराई गई थी। इस संबंध में अधीक्षण पुरातत्वविद उत्तराखंड डा. एमसी जोशी का कहना है कि खोदाई का कार्य अभी चल रहा है। चौथी वेदिका के बारे में पता लगाना अभी जल्दबाजी होगा। इसके लिए अलग-अलग स्थान पर खोदाई की जाएगी, तब जाकर निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है।

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    महत्वपूर्ण यज्ञ स्थलों में से एक है यह स्थान

    गौरतलब है कि राजा शीलवर्मन (लगभग तीसरी शताब्दी ईस्वी) कुणिंद वंश के शासक थे, जिन्होंने चार अश्वमेध यज्ञ कराए। इसके प्रमाण उत्खनन में मिली ब्राह्मी लिपि वाली ईंटों से मिल चुके हैं।

    उनका साम्राज्य हरिपुर से लाखामंडल तक फैला था, उनकी राजधानी हरिपुर थी। इसी कारण यह स्थान प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण यज्ञ स्थलों में गिना जाता है। कालसी गेट स्थित अशोक शिलालेख के निकट बाढ़वाला ग्राम पंचायत के जगतग्राम में वेदिकाओं से जुड़े अन्य अवशेषों का पता लगाया जा रहा है।

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