देहरादून में गूंगा बाबा बनकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिक को कारावास, सजा काटने के बाद होगा डिपोर्ट
विकासनगर कोर्ट ने बांग्लादेशी नागरिक रुकन रकब उर्फ शाह आलम को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने का दोषी ठहराया। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
बांग्लादेशी नागरिक रुकन रकब को अवैध प्रवेश पर सजा
विकासनगर कोर्ट ने एक साल दो माह की कैद सुनाई
सजा पूरी होने पर बांग्लादेश निर्वासित किया जाएगा
जागरण संवाददाता, विकासनगर (देहरादून)। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकासनगर जतिन मित्तल की अदालत ने बांग्लादेशी नागरिक रूकन रकब उर्फ शाह आलम को पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम व विदेशी अधिनियम के तहत अपराध का दोषी करार दिया।
साथ ही उसे एक वर्ष दो माह साधारण कारावास की सजा सुनाई। एक हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अर्थदंड अदा न करने की दशा में उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया कि दोषी की सजा पूरी होने के बाद उसके निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की जाए।
उत्तराखंड पुलिस ने आपरेशन कालनेमि के तहत 11 जुलाई 2025 को रूकन रकब उर्फ शाह आलम को सहसपुर क्षेत्र से पकड़ा था। वह ग्राम लक्ष्मीपुर चोरखाला के पास शनिदान बाबा का रूप धरे सड़क किनारे बैठा हुआ था।
पूछने पर लोगों ने बताया कि यह व्यक्ति शायद गूंगा है। वह किसी से कुछ बातचीत नहीं करता, भीख मांगकर जीवनयापन करता है।
पुलिस ने जब सख्ती की तो वह धीमी आवाज में बंगाली भाषा में बोला। पूछने पर उक्त व्यक्ति पहचान संबंधी कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका।
इस पर पुलिस ने दुभाषिए को बुलाया। गहनता से पूछताछ करने पर युवक ने अपनी पहचान रुकन रकब उर्फ शाहआलम पुत्र आबूर उर्फ नईम अली उर्फ नायाब अली निवासी गांव सखीपुर जिला टंगाइल (बांग्लादेश) के रूप में बताई।
कहा कि वह लगभग एक वर्ष पूर्व घर से नाराज होकर बांग्लादेश बार्डर पारकर अवैध रूप से भारत आ गया। कुछ समय कोलकाता में रहा। भीख मांगकर गुजारा करता रहा।
पकड़े जाने के डर से वह गूंगा बनकर रहता था। कुछ दिन पहले ही वह ट्रेन से देहरादून आया था। किसी को शक न हो, इसलिए यहां भी गूंगा बनकर बाबा का भेष बनाकर रह रहा था।
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