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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 03, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    उत्तरकाशी के भाजपा कार्यकर्ता अमर सिंह ने 18 किमी बर्फ में चलकर दिखाया समर्पण

    By Sunil NegiEdited By:
    Updated: Sun, 03 Feb 2019 08:45 PM (IST)

    उत्तरकाशी के अमर सिंह रावत गांव में पांच फीट बर्फ के बावजूद 18 किमी बर्फीला रास्ता पैदल तय कर भाजपा के त्रिशक्ति सम्मेलन में भाग लेने दून पहुंचे। ...और पढ़ें

    उत्तरकाशी के भाजपा कार्यकर्ता अमर सिंह ने 18 किमी बर्फ में चलकर दिखाया समर्पण
    उत्तरकाशी के भाजपा कार्यकर्ता अमर सिंह ने 18 किमी बर्फ में चलकर दिखाया समर्पण

    देहरादून, जेएनएन। उत्तरकाशी के लिवाड़ी गांव निवासी उत्तरकाशी के अमर सिंह रावत गांव में पांच फीट बर्फ के बावजूद 18 किमी बर्फीला रास्ता पैदल तय कर भाजपा के त्रिशक्ति सम्मेलन में भाग लेने दून पहुंचे। पार्टी के प्रति अमर सिंह का समर्पण राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मन को छू गया। शाह ने अमर सिंह को मंच पर बुलाकर उनका सम्मान किया। कहा कि पार्टी को ऐसे कार्यकर्ताओं की जरूरत है। इसके बाद तो अमर सिंह सम्मेलन में चर्चा का विषय बन गए।

    देहरादून के परेड ग्राउंड में भाजपा के टिहरी और हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र के त्रिशक्ति सम्मेलन में यूं तो 10 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता शामिल हुए, लेकिन हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे लिवाड़ी गांव के अमर सिंह रावत का पार्टी सिपाही के रूप में समर्पण हर किसी के दिल को छू गया। गांव में करीब पांच फीट बर्फ के बीच अमर सिंह कठिन डगर पार कर पहले सुनकुंडी और फिर वहां से नैटवाड़ होते हुए मोरी पहुंचे। जहां से वाहन से वह देहरादून आए। 

    बर्फबारी में चलने के बाद उनके जूते भीग गए थे। इसलिए वह सम्मेलन में चप्पल पहनकर पहुंचे। अमर सिंह के पार्टी के प्रति समर्पण पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। कहा कि अमर सिंह का यह समर्पण तारीफ के लायक है। अमर सिंह ने बताया कि वह 1982 से आरएसएस से नाता रखने के चलते पार्टी से जुड़े हैं। वर्तमान में वह लिवाड़ी बूथ नंबर 90 के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

    डॉक्टर न होने का दिखा दर्द 

    अमर सिंह ने कहा कि 2005 में सड़क स्वीकृत हुई थी। इस पर अभी काम शुरू नहीं हुआ। इसे लेकर वह मुख्यमंत्री से मिलना चाहते थे। बोले, क्षेत्र में कोई डाक्टर नहीं है। इसलिए इलाज के लिए मरीज और तीमारदार को मोरी या पुरोला आना पड़ता है। यदि क्षेत्र में डॉक्टर तैनात हो तो लोगों को बड़ी राहत मिल जाएगी। 

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