यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 07, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इन छात्रों की आंखों में रोशनी नहीं, फिर भी रोशन है जीवन; जानिए इनके बारे में
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के दृष्टिबाधित छात्रों ने सीबीएसई की दसवीं बोर्ड परीक्षा में एक बार फिर अपना परचम लहराया है। ...और पढ़ें

देहरादून, जेएनएन। आंखों में रोशनी नहीं, लेकिन फिर भी जीवन रोशन है। जीवन में तमाम विषम परिस्थितियां हैं, फिर भी हार मानना मंजूर नहीं। यही परिचय है राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (एनआइईपीवीडी) के दृष्टिबाधित छात्रों का, जिन्होंने सीबीएसई की दसवीं बोर्ड परीक्षा में एक बार फिर अपना परचम लहराया है।
संस्थान के मॉडल स्कूल के छात्र धर्मेंद्र (आर्ट) ने 94.6 प्रतिशत अंकों के साथ स्कूल टॉप किया है। जबकि, विकास चौधरी (साइंस) 93.4 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे व साइंस वर्ग में टॉप पर रहे। नागेंद्र (आर्ट) 92.6, सलोनी 92.2 प्रतिशत अंकों के साथ क्रमश: तीसरे व चौथे स्थान पर रहे। इसके अलावा विज्ञान वर्ग में भरत 89.8, दीपक 89.6 प्रतिशत अंकों के साथ क्रमश: दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे।
स्कूल टॉप करने वाले धर्मेंद्र किसान के बेटे हैं और प्रोफेसर बनना चाहते हैं। वहीं, विकास चौधरी भी दिल्ली विश्वविद्यालय से आगे की पढ़ाई कर प्रोफेसर बनना चाहते हैं। एनआइईपीवीडी के छात्र शुरू से ही प्रेरणा के रूप में सामने आते रहे हैं। जब सुविधा संपन्न लोग संसाधन हाथ में होने के बावजूद हालातों के आगे हार मान लेते हैं, वहीं ये छात्र शारीरिक विषमता और आर्थिक तंगी के बीच विकट हालातों में भी परिस्थिति का डटकर सामना करते हैं। संस्थान के निदेशक नचिकेता राउत ने टॉपर रहे छात्रों को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर प्रिंसिपल डॉ. गीतिका माथुर, वाइस प्रिंसिपल अमित शर्मा, योगेश अग्र्रवाल समेत कई अन्य उपस्थित रहे।
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