उत्तराखंड में चारधाम रूट की सभी सड़कें 15 अप्रैल तक होंगी दुरुस्त, कुल 207 भूस्खलन जोन चिह्नित
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए 15 अप्रैल तक सभी प्रमुख मार्ग दुरुस्त किए जाएंगे। 207 भूस्खलन ...और पढ़ें

चारधाम।
HighLights
15 अप्रैल तक चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्ग दुरुस्त होंगे।
207 भूस्खलन जोन में से अधिकांश पर कार्य पूरा।
यात्रियों के लिए क्यूआर कोड और व्हाट्सएप अलर्ट सिस्टम।
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए 15 अप्रैल तक सभी प्रमुख मार्गों को दुरुस्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग व राष्ट्रीय राजमार्ग विंग संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि यात्रा मार्गों की नियमित समीक्षा की जा रही है और अधिकारियों को चिह्नित कमियों को जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में कुल 207 भूस्खलन जोन चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 88 स्थानों पर स्लोप ट्रीटमेंट पूरा हो चुका है, जबकि 119 पर कार्य अंतिम चरण में है।
उन्होंने बताया कि यमुनोत्री और केदारनाथ मार्ग सबसे संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं। ऋषिकेश-बदरीनाथ एनएच-7 पर चिह्नित 45 डेंजर जोन में से 22 पर युद्धस्तर पर काम जारी है।
पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सड़क, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएं और ट्रैफिक प्रबंधन को पूरी तरह सुदृढ़ किया जा रहा है। आल वेदर रोड परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है।
मंत्री महाराज ने बताया कि यात्रा मार्गों पर क्यूआर कोड और साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं, इससे श्रद्धालुओं को सही रूट की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही व्हाट्सएप अलर्ट सिस्टम के माध्यम से जाम, भीड़ और आपात स्थिति की सूचना तुरंत यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी।
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उन्होंने कहा कि सभी वैकल्पिक मार्गों को भी सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मुख्य मार्ग बाधित होने की स्थिति में यातायात प्रभावित न हो। विभिन्न मोटर मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों को दुरुस्त कर यात्रा को सुरक्षित और निर्बाध बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
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मंत्री ने जानकारी दी कि सिलक्यारा टनल का ब्रेकथ्रू पूरा हो चुका है और बदरीनाथ-केदारनाथ हाईवे को जोड़ने वाली 900 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण भी पूर्ण हो गया है, जिससे यात्रा और अधिक सुगम होगी।