‘बेटी हुई है’ कार पर पोस्टर लगाकर पूरे देहरादून को दिया बता, नन्ही कृधा को अनूठे अंदाज में घर लाया परिवार
देहरादून में करण और दीक्षा अरोड़ा ने अपनी बेटी कृधा के जन्म का अनूठा जश्न मनाया। गुलाबी गुब्बारों से सजी कार पर 'बेटी हुई है' लिखकर उसे अस्पताल से घर ...और पढ़ें
HighLights
गुलाबी गुब्बारों से सजी कार पर लिखा 'बेटी हुई है'
करण और दीक्षा अरोड़ा ने बेटी कृधा के जन्म का जश्न मनाया
यह उत्सव बेटियों के प्रति बदलती सामाजिक सोच दर्शाता है
सुमित थपलियाल, देहरादून। गुलाबी गुब्बारों से सजी कार सड़क पर आगे बढ़ रही थी, पीछे बड़े अक्षरों में लिखा था कि ‘बेटी हुई है’। कार जैसे-जैसे आगे बढ़ी, राह चलते लोग ठहरकर उसे देखने लगे। किसी ने मोबाइल निकाला, किसी ने मुस्कुराकर परिवार को बधाई दी।
दून में बेटी के जन्म का यह अलग अंदाज इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर खास चर्चा में है। यह दृश्य केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच का प्रभावी संदेश भी बन गया है।

माउंट व्यू कालोनी सहस्रधारा रोड निवासी करन अरोड़ा और दीक्षा अरोड़ा के घर चार अप्रैल को चकराता रोड स्थित लूथरा मैटरनिटी एंड इनफर्टिलिटी सेंटर में बेटी का जन्म हुआ।
एक अप्रैल को भर्ती होने के बाद परिवार को जब नन्ही बिटिया के जन्म की सूचना मिली तो घर से ही दो वाहनों को गुलाबी गुब्बारों से सजाकर अस्पताल पहुंचा गया।
अस्पताल परिसर में भी परिवार और चिकित्सकों ने बच्ची का स्वागत किया। इसके बाद नवजात को विशेष अंदाज में घर लाया गया।
परिवार के बड़े सदस्य व करन के बड़े भाई अर्जुन अरोड़ा ने बताया कि घर में बहन नहीं होने के कारण लंबे समय से परिवार में बेटी के आगमन की इच्छा थी।
जैसे ही छोटे भाई करन और दीक्षा ने बेटी के जन्म की सूचना दी, परिवार ने इसे लक्ष्मी का आगमन मानकर उत्सव की तरह मनाने का निर्णय लिया।

इसलिए रखा जाएगा नाम ‘कृधा’
अर्जुन अरोड़ा के अनुसार परिवार की वृंदावन और राधा-कृष्ण में विशेष आस्था है। परिवार समय-समय पर वृंदावन जाता है। मानता है कि परिवार की खुशहाली ईश्वर की कृपा से है। इसी आस्था से प्रेरित होकर नवजात का नाम ‘कृधा’ रखने का निर्णय लिया गया है।
वृंदावन से बदली सोच, परिवार ने अपनाया शाकाहार
अर्जुन ने बताया कि पहले परिवार में मांसाहार होता था, लेकिन वृंदावन यात्रा के बाद जीवनशैली बदली और अब पूरा परिवार शाकाहारी है। उनका कहना है कि आध्यात्मिक जुड़ाव ने परिवार में शांति और संतुलन बढ़ाया है।
इंदिरा मार्केट में व्यवसाय से जुड़े अर्जुन अरोड़ा और मर्चेंट नेवी में कार्यरत करन अरोड़ा के परिवार का यह जश्न अब इंटरनेट मीडिया पर लोगों के लिए सकारात्मक संदेश बन गया है, बेटी के जन्म पर उत्सव अब नई सामाजिक पहचान बन रहा है।
खबरें और भी
बदलती सोच की नई तस्वीर
कुछ वर्ष पहले तक बेटियों के जन्म पर परिवारों में उत्साह कम दिखाई देता था, लेकिन अब शहर में ऐसे दृश्य सामाजिक बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
बेटी के जन्म को सार्वजनिक उत्सव की तरह मनाना यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी बेटियों को सम्मान, गर्व और खुशहाली के प्रतीक के रूप में स्वीकार कर रही है। यही सोच समाज में सकारात्मक बदलाव की सबसे मजबूत आधारशिला बन रही है।