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    देहरादून भाजपा नेता हत्याकांड में पुलिस पर सवाल, मुख्य आरोपितों के बचाव में कोतवाल बोले... ''ये बच्चे हैं, छोड़ दो''

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 08:40 AM (GMT+05:30)

    भाजपा नेता विनोद कश्यप हत्याकांड में पीड़ित परिवार ने सहसपुर कोतवाल पर मुख्य आरोपितों से सुलह का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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    HighLights

    1. भाजपा नेता हत्याकांड: परिवार ने कोतवाल पर सुलह का आरोप लगाया

    2. मुख्य आरोपितों को सामने बैठाकर समझौते का दबाव बनाने की कोशिश

    3. मुख्यमंत्री से कोतवाल को हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग

    संवाद सूत्र, सेलाकुई। भाजपा नेता विनोद कश्यप हत्याकांड में अब निशाने पर सीधे सहसपुर कोतवाल प्रदीप सिंह रावत आ गए हैं। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि हत्या के मुख्य आरोपितों को सामने बैठाकर उन पर समझौते का दबाव बनाया गया।

    इंटरनेट मीडिया पर प्रसारिंत हुए वीडियो में मृतक के भाई अशोक कुमार ने कोतवाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

    अशोक कुमार का आरोप है कि घटना से जुड़े कुछ वीडियो की पहचान कराने के बहाने उनके छोटे भाई को कोतवाली बुलाया गया था। इसके बाद वह अपने स्वजनों के साथ वहां पहुंचे। उनका दावा है कि कोतवाल के कक्ष में प्रवेश करते ही उन्होंने मुख्य आरोपित अमन, सावेज और आजम को पुलिसकर्मियों के साथ बैठे देखा।

    लगातार समझौता करने का दबाव 

    पीड़ित परिवार के अनुसार, इसी दौरान मुख्य आरोपित अमन उनके सामने हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा। विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव किया। अशोक कुमार का आरोप है कि इसके बाद सहसपुर कोतवाल ने कहा, ''''ये छोटे-छोटे बच्चे हैं, इनकी जिंदगी खराब हो जाएगी, इन्हें छोड़ दो। अब इसमें कुछ नहीं हो सकता।'''' परिवार का कहना है कि उन पर लगातार समझौता करने का दबाव बनाया गया।

    वीडियो में पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाया है कि हत्या के आरोपितों के साथ पीड़ित परिवार को आमने-सामने बैठाने की जरूरत क्या थी। उनका आरोप है कि न्याय दिलाने के बजाय पुलिस समझौते की भूमिका निभाती दिखाई दी।

    परिवार ने मुख्यमंत्री और पुलिस मुख्यालय से पूरे घटनाक्रम की जांच कराने, सहसपुर कोतवाल को तत्काल हटाने और मामले की निष्पक्ष विवेचना किसी अन्य अधिकारी से कराने की मांग की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब तक वर्तमान पुलिस टीम रहेगी, उन्हें निष्पक्ष जांच पर भरोसा नहीं है।

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