दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देगा उत्तराखंड की ज्ञान अर्थव्यवस्था को मजबूती, युवाओं को होगी आसानी
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखंड की ज्ञान अर्थव्यवस्था और शिक्षा को मजबूत करेगा। यह छात्रों को दिल्ली जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों तक 2.5 घंटे म ...और पढ़ें
HighLights
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे ज्ञान अर्थव्यवस्था को देगा मजबूती।
छात्रों को दिल्ली पहुंचने में अब लगेंगे मात्र ढाई घंटे।
आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थानों से बढ़ेगा शैक्षणिक जुड़ाव।
अशोक केडियाल, देहरादून। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे केवल यातायात को तेज और सुगम बनाने का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि यह भविष्य में राज्य की ज्ञान अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड में गुणवत्ता शिक्षा की दिशा में भी एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राज्य के युवाओं के लिए देश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।
अब तक उत्तराखंड के छात्रों को दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब जैसे शहरों में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और शोध कार्यों के लिए लंबी और थकाऊ यात्रा करनी पड़ती थी। दिल्ली पहुंचने में जहां पहले पांच से छह घंटे का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी मात्र ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। इसी तरह चंडीगढ़ तक भी कम समय में पहुंच संभव होगी।
यूपीएससी-अंतरिक्ष विज्ञान जैसे तैयारियों को मिली राह
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उन करीब 12 से 14 हजार छात्र-छात्राओं को मिलेगा जो यूपीएससी, बैंकिंग, इंजीनियरिंग, मेडिकल और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में करियर बनाना चाहते हैं। बेहतर कोचिंग संस्थानों, पुस्तकालयों और शोध संस्थानों तक तेज पहुंच मिलने से उनकी तैयारी और प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार होगा।
आईआईटी दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थान बनेंगे विकल्प
एक्सप्रेसवे के माध्यम से देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, विशेषकर आईआईटी दिल्ली, आइसर मोहली चंडीगढ़ विवि जैसे उच्च संस्थानों के साथ उत्तराखंड के शैक्षणिक संस्थानों का जुड़ाव भी मजबूत होगा। इससे संयुक्त शोध, नवाचार और शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए स्थानीय विवि पर निर्भरता भी कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य के कालेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
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शिक्षाविद और विशेषज्ञ दून आने में रुचि लेंगे
शिक्षाविद और विशेषज्ञ उत्तराखंड आने में रुचि लेंगे जिससे राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं, सेमिनारों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या बढ़ सकती है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, क्योंकि वे अब बड़े शहरों के संसाधनों से बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे और युवाओं के लिए शिक्षा का नया रास्ता भी खोलेगा।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को गति मिलेगी। राजधानी दिल्ली से उत्तराखंड का कनेक्ट और मजबूत होगा।’ /B
-डाॅ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री
राज्य का शिक्षा परिदृश्य:
- स्ववित्तपोषित संस्थान, 383
- राजकीय महाविद्यालय, 119
- राजकीय व निजी विवि 46
- आइटीआइ, पालीटेक्निक : 140
- छात्र संख्या : 4,50,000
| स्कूल का प्रकार | संख्या |
| प्राथमिक विद्यालय | 11,580 |
| माध्यमिक विद्यालय | 1,218 |
| इंटर कालेज | 1,385 |
| निजी स्कूल | 5,396 |
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