उत्तराखंड में मधुमेह का साइलेंट अटैक: 1.33 लाख लोग बीमारी से अनजान
उत्तराखंड में हुए मधुमेह जांच अभियान में 2.34 लाख लोगों की स्क्रीनिंग में से 1.33 लाख से अधिक लोग मधुमेह पीड़ित पाए गए, जिनमें से कई अपनी बीमारी से अन ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

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अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। उत्तराखंड में मधुमेह जांच अभियान ने प्रदेश में शुगर के साइलेंट अटैक की सच्चाई उजागर कर दी है। पहाड़ से मैदान तक लाखों लोग शुगर के साथ जिंदगी गुजार रहे थे, उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी।
राज्य में 2.34 लाख लोगों की जांच हुई तो 1.33 लाख से अधिक लोग मधुमेह पीड़ित पाए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग हर दूसरी जांच में एक नया डायबिटीज मरीज सामने आया। यह आंकड़ा बदलती जीवनशैली, बिगड़ते खानपान व स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती लापरवाही का खतरनाक संकेत दे रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखंड में मधुमेह समेत गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग का अभियान राष्ट्रीय कार्यक्रम नेशनल प्रोग्राम फार प्रिवेंशन एंड कंट्रोल आफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक के तहत चला रहा है।
राज्य में 30 वर्ष से अधिक उम्र के 2,34,204 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 1,33,560 डायबिटीज मरीज सामने आने पर उन्हें जिला अस्पतालों के माध्यम से उपचार दिलाया जा रहा है। देहरादून में सर्वाधिक 28,920 लोगों में मधुमेह की पुष्टि हुई।
हरिद्वार में 25,854 और ऊधम सिंह नगर में 20,496 नए मरीज सामने आए। नैनीताल में 18,919 और पौड़ी गढ़वाल में 7,390 मरीजों को उपचार से जोड़ा गया है। छोटे जिलों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। चमोली में 5,293, पिथौरागढ़ में 3,986, चंपावत में 3,510 और रुद्रप्रयाग में 3,000 लोगों में मधुमेह की पहचान हुई है।
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इलाज में आगे, निगरानी बढ़ाने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग ने उपचार लक्ष्य का 86 प्रतिशत हासिल करने का दावा किया है, लेकिन बड़ी चुनौती मरीजों का नियमित फालोअप बनी हुई है। उपचार में शामिल 1.33 लाख मरीजों में से केवल 27,054 मरीजों की निगरानी हो पा रही है।
फैक्ट-फाइल- मधुमेह जांच अभियान
- 4.50 लाख की होनी है स्क्रीनिंग, 2.34 लाख लोगों की हुई शुगर जांच
- 1.55 लाख को देना है उपचार, 1.33 लाख नए मरीज लेने लगे ट्रीटमेंट
इन जिलों में लक्ष्य से अधिक उपचार
- चमोली -5,293 (140%)
- चंपावत - 3,510 (138%)
- नैनीताल -18,919 (129%)
एनएचएम के तहत चले स्क्रीनिंग अभियान में बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आए हैं, जिन्हें खुद यह जानकारी नहीं थी कि वे डायबिटीज से पीड़ित हैं। अभियान का उद्देश्य मरीजों को नियमित निगरानी से जोड़ना है। गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्क्रीनिंग पहुंचाने के कारण बड़ी आबादी पहली बार जांच के दायरे में आई है, जिससे भविष्य में गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद मिलेगी।’
-डा. रश्मि पंत, एनएचएम निदेशक
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