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    देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज में पूजा-पाठ को लेकर विवाद, जांच के बाद भी बरकरार है टकराव

    Updated: Tue, 28 Apr 2026 05:58 PM (GMT+05:30)

    दून मेडिकल कॉलेज में पूजा-पाठ को लेकर शुरू हुआ विवाद जांच के बाद भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। ...और पढ़ें

    राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ता और डॉक्टरों की बैठक लेती प्राचार्य डा गीता जैन

    राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ता और डॉक्टरों की बैठक लेती प्राचार्य डा गीता जैन

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    जागरण संवाददाता, देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कालेज में पूजा-पाठ को लेकर शुरू हुआ विवाद सोमवार को भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका।

    पैथोलाजी विभागाध्यक्ष डा. गजाला रिजवी पर महिला सहकर्मी की पूजा में हस्तक्षेप, कलावा व तिलक पर आपत्ति जताने के आरोपों पर कालेज प्रशासन ने जांच तो पूरी कर ली, लेकिन मामला किसी स्पष्ट निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका।

    जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने की बात कही गई, इसके बावजूद माहौल शांत करने के लिए कालेज परिसर स्थित मंदिर में सामूहिक पूजा कराई गई।

    सोमवार को कालेज प्राचार्य गीता जैन की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित चिकित्सक, हिंदू रक्षा दल के पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक में प्रशासन ने बताया कि जांच के दौरान ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि विभागाध्यक्ष ने आरोपित टिप्पणी की या पूजा रोकने जैसा व्यवहार किया।

    हालांकि, जांच रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद कालेज परिसर के मंदिर में डाक्टरों और हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पूजा-अर्चना कराई गई।

    इसे प्रशासन की ओर से तनाव कम करने की कोशिश माना गया, लेकिन संगठन ने साफ कर दिया कि मामला उनके लिए समाप्त नहीं हुआ है।

    हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा कि यदि भविष्य में किसी कर्मचारी या चिकित्सक की धार्मिक आस्था में हस्तक्षेप की शिकायत फिर सामने आई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि सनातन पर टिप्पणी या पूजा-पाठ में बाधा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

    शनिवार को मेडिकल कालेज में हुआ था प्रदर्शन

    पूरा विवाद शनिवार को उस समय उभरा था जब हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने मेडिकल कालेज पहुंचकर प्रदर्शन किया था।

    आरोप लगाया गया कि महिला कर्मचारी जब परिसर स्थित मंदिर में पूजा करती हैं तो उन पर बार-बार आपत्ति जताई जाती है।

    संगठन का आरोप था कि कलावा पहनने पर टिप्पणी की गई, तिलक लगाने पर सवाल उठाए गए और पूजा-पाठ के दौरान अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया। इसी आधार पर विभागाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

    प्रशासन संतुलन में, लेकिन असंतोष खत्म नहीं

    कालेज प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर फिलहाल किसी दंडात्मक कार्रवाई से दूरी बनाई है, लेकिन जिस तरह बैठक के बाद भी संगठन ने सार्वजनिक चेतावनी दी, उससे साफ है कि मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ।

    कालेज के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा बनी रही। कई चिकित्सक इसे अनावश्यक विवाद मान रहे हैं, जबकि संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।

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