उत्तराखंड में जंगल की आग: 337 घटनाओं में 276 आग उच्च शिखरीय वन प्रभागों में
उत्तराखंड में इस बार जंगल की आग उच्च शिखरीय वन प्रभागों तक पहुंच गई है, जिससे वन विभाग चिंतित है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में इस बार धधकते जंगलों ने वन विभाग के अधिकारियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। आग की तपिश उच्च शिखरीय वन प्रभागों तक अधिक महसूस की जा रही है।
राज्य में 15 फरवरी से अब तक वनों में आग की 337 घटनाएं हुई, जिनमें से 276 बदरीनाथ, रुद्रप्रयाग, केदारनाथ, पिथौरागढ़, अलकनंदा जैसे समेत 10 उच्च शिखरीय वन प्रभागों में हुई हैं। इससे चिंता अधिक बढ़ गई है।
आग बुझाने में सेना की भी लेंगे मदद
मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन सुशांत पटनायक के अनुसार पहाड़ के जंगलों में आग की घटनाएं, वहीं अधिक हैं, जहां चीड़ के वन हैं और सूखे पिरुल की परत जमा है।
उच्च शिखरीय वन प्रभागों में भी आग का यही मुख्य कारण है। इसे देखते हुए पिरुल एकत्रीकरण का कार्य शुरू कर दिया है।
उन्होंने बताया कि सूर्यास्त के बाद जंगलों में लगी आग बुझाने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ ही सेना व अर्द्धसैनिक बलों की मदद लेने के निर्देश भी वन प्रभागों को दिए गए हैं।
राज्य में आग की घटनाएं
- (15 फरवरी, 2026 से अब तक)
- क्षेत्र, घटनाएं, प्रभावित क्षेत्र
- गढ़वाल, 251, 208.12
- कुमाऊं, 54, 51.1
- वन्यजीव परिरक्षण, 32, 24.5
अग्नि प्रभावित टाप टेन वन प्रभाग
- प्रभाग, घटनाएं, प्रभावित क्षेत्र
- बदरीनाथ, 72, 24.69
- रुद्रप्रयाग, 34, 23.62
- पिथौरागढ़, 32, 28.25
- केदारनाथ (वन्यजीव प्रभाग, 31, 22
- अलकनंदा (भूमि संरक्षण), 25, 15
- पौड़ी (भूमि संरक्षण), 19, 10.5
- गढ़वाल, 18, 39.4
- टिहरी, 18, 12.7
- कालसी (भूमि संरक्षण), 14, 28.25
- चकराता, 13, 18.15
- (नोट: घटनाएं संख्या और प्रभावित क्षेत्र हेक्टेयर में)
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