Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    उत्तराखंड में आदमखोर और बीमार गुलदारों के लिए सरकार का मेगा प्लान, 10 जिलों में बनेंगे रिहैबिलिटेशन सेंटर

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 08:08 PM (IST)

    उत्तराखंड वन विभाग मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए 10 जिलों में क्षेत्रीय गुलदार ट्रांजिट उपचार और पुनर्वास केंद्र स्थापित करेगा। ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. उत्तराखंड में 10 नए गुलदार पुनर्वास केंद्र बनेंगे

    2. मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने को बड़ी तैयारी

    3. कैंपा से 16 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित

    केदार दत्त, देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और रेस्क्यू के बाद घायल-बीमार व आदमखोर गुलदारों के उपचार एवं उनके ठिकाने की चुनौती से निबटने काे वन विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है।

    इस कड़ी में राज्य के 10 जिलों में एक-एक रीजनल लेपर्ड ट्रांजिट ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जाएंंगे।

    इनके निर्माण को क्षतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) से 16 करोड़ रुपये का बजट भी प्रस्तावित कर दिया गया है। अब केवल केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी का इंतजार है।

    राज्य में वन्यजीवों के हमलों पर नजर दौड़ाएं तो इसमें गुलदार सबसे अधिक मुसीबत बनकर उभरे हैं। कई बार बीमार, घायल अथवा शिकार करने में असमर्थ हो चुके गुलदार आसान भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं।

    ऐसे में उनके मनुष्यों पर हमले की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इन गुलदारों को पकड़ने के बाद इनके उपचार और सुरक्षित रखने व निगरानी की चुनौती भी वन विभाग के सामने खड़ी हो जाती है।

    दरअसल, वर्तमान में हरिद्वार, ढेला, रानीबाग व अल्मोड़ा में ही रेस्क्यू सेंटर हैं। इससे हरिद्वार, नैनीताल व अल्मोड़ा जिले तो कवर हो जाते हैं, लेकिन अन्य जिलों से पकड़े गए गुलदारों को यहां तक लाने में दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।

    स्थिति यह है कि चारों सेंटर में 40 से ज्यादा गुलदार रखे गए हैं और अब वहां जगह नहीं बची है। इस समस्या को देखते हुए विभाग ने शेष सभी 10 जिलों में एक-एक रीजनल लेपर्ड ट्रांजिट ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

    अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव विवेक पांडेय के अनुसार रुद्रप्रयाग, चमोली समेत अन्य जिलों में इन सेंटर के लिए भूमि चयनित कर ली गई है। कैंपा मद से इनके लिए 16 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है।

    उन्होंने बताया कि इन सेंटर की स्थापना के दृष्टिगत केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि वहां से जल्द ही इसके लिए मंजूरी मिल जाएगी।

    उन्होंने कहा कि इन सेंटर में घायल, बीमार अथवा रेस्क्यू किए गए गुलदारों का प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परीक्षण, निगरानी और पुनर्वास किया जाएगा।

    यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में गहराता मानव-वन्यजीव संघर्ष: 14 सालों में गुलदार और बाघों ने 63 हजार मवेशियों को बनाया शिकार

    यह भी पढ़ें- पौड़ी: यमकेश्वर के देवराना गांव में गुलदार का आतंक, महिला पर हमला कर किया जख्मी

    खबरें और भी