Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 07, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    उत्तराखंड चुनावः हड़बड़ी में सरकार ने ताक पर रखे नियम

    By BhanuEdited By:
    Updated: Sun, 08 Jan 2017 07:20 AM (IST)

    उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 के लिए आचार संहिता लगने से पहले सरकार से बांटे गए दायित्वों में नियम कायदों को भी ताक पर रखा गया। ऐसे पद सृजित किए गए, ज ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने से पहले सरकार से चुनावी हड़बड़ी में पार्टी पदाधिकारियों को खुश करने के लिए बांटे गए दायित्वों में नियम कायदों को भी ताक पर रखा गया।

    हालत यह है कि आनन फानन ऐसे पद सृजित किए गए, जो ढांचे में थे ही नहीं। अब इन पदों के सृजन पर नियमावली को आधार बनाते हुए विभागीय अधिकारी ही आपत्ति लगा रहे हैं।

    पढ़ें-उत्तराखंड विधानसभा चुनावः कांग्रेस की सजग और आक्रामक रणनीति

    सरकार की ओर से पिछले एक पखवाड़े में बड़ी संख्या में दायित्वधारी बनाए गए। इन्हें सरकारी सुविधाएं भी प्रदान की गई। सरकार का कहना था कि पदाधिकारियों को सम्मान देने के लिए यह कदम उठाया गया। स्थिति यह हुई कि कार्यकर्ताओं को सम्मान देने से पहले नियम व कायदों को भी ताक पर रखा गया।

    पढ़ें-उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017: दूसरे व चौथे शनिवार को नहीं होंगे नामांकन

    ऐसा ही एक उदाहरण परिवहन विभाग में सड़क सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष का भी है। दरअसल, सड़क सुरक्षा परिषद का गठन सुप्रीम कोर्ट की ओर से सड़क सुरक्षा पर निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठित समिति के निर्देश पर किया गया। सड़क सुरक्षा परिषद का गठन मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अंतर्गत किया गया है।

    पढ़ें:-उत्तराखंड में नए जिले न बनने पर सियासी बवाल

    जब इसका ढांचा तैयार किया गया, तब इसमें उपाध्यक्ष का पद नहीं था। परिषद में विभागीय मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष और सचिव परिवहन इसके पदेन सचिव हैं। इसके अलावा सभी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव इसके पदेन सदस्य हैं। इसमें राजनीतिक पद का कोई उल्लेख नहीं है।

    पढ़ें: विस चुनाव से पहले उत्तराखंड सरकार ने लागू किया सातवां वेतनमान

    वहीं, दायित्व बांटने में मशगूल सरकार ने 25 दिसंबर को सड़क सुरक्षा परिषद में ओखल कांडा नैनीताल के सतीश नैनवाल को उपाध्यक्ष बना दिया। यहां तक कि उन्हें ख श्रेणी के दायित्वधारी को अनुमन्य सुविधा भी प्रदान कर डाली। आनन फानन हुए निर्देशों में नियमों की अवहेलना का ध्यान ही नहीं दिया गया।

    खबरें और भी

    पढ़ें:-उत्तराखंड चुनाव: गंवाई सत्ता पाने को भाजपा का हर मुमकिन दांव

    अब जब शासन के कुछ अधिकारियों का ध्यान इस ओर दिलाया गया तो उन्होंने सचिव परिवहन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराते हुए इस आदेश पर आपत्ति लगाई है।

    पढ़ें-उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017: 400 करोड़ कर्ज से लगेगा सातवें वेतन का चुनावी दांव

    पढ़ें-उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017: कटे 1.85 लाख वोटर, कारण जानिए

    पढ़ें-उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017: सूबे की माली हालत खराब, कैसे पूरे होंगे ख्वाब

    उत्तराखंंड चुनाव से संबंधित खबरों केे लिए यहां क्लिक करेंं--