GSI की चौंकाने वाली रिपोर्ट, लैंडस्लाइड के हाई रिस्क में उत्तराखंड का 22 प्रतिशत हिस्सा
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की मैपिंग के अनुसार, उत्तराखंड का 22 प्रतिशत क्षेत्र भूस्खलन के उच्च जोखिम में है।


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सुमन सेमवाल, देहरादून। उत्तराखंड का 22 प्रतिशत क्षेत्र भूस्खलन के उच्च जोखिम में शामिल है। यह चौंकाने वाली तस्वीर भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की राष्ट्रीय भूस्खलन संवेदनशीलता मैपिंग में सामने आई। जिसमें राज्य के करीब 39 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का विज्ञानी आकलन किया गया है।
इसमें 18 हजार वर्ग किलोमीटर (46 प्रतिशत) क्षेत्र कम संवेदनशील, करीब 12 हजार वर्ग किलोमीटर (32 प्रतिशत) मध्यम संवेदनशील और नौ हजार वर्ग किलोमीटर (22 प्रतिशत) क्षेत्र उच्च संवेदनशीलता वाली श्रेणी में है।
जीएसआई के आकलन में उत्तराखंड में 14,780 भूस्खलन दर्ज किए गए और भूस्खलन घनत्व 0.38 प्रति वर्ग किलोमीटर रहा। इसी तरह पड़ोसी राज्य और सर्वाधिक संवेदनशीलता वाले हिमाचल प्रदेश में 17,102 भूस्खलन व घनत्व 0.41 प्रति वर्ग किमी रहा।
19 राज्यों में 4.3 लाख वर्ग किमी की मैपिंग
जीएसआई ने 1:50000 पैमाने पर देश के भूस्खलन संभावित पहाड़ी क्षेत्रों की मैपिंग पूरी कर ली है। हिमालय, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी घाट समेत 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 4.3 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मैप किया गया। इसमें करीब 91 हजार ऐतिहासिक भूस्खलनों का डाटा जुटाया गया और 33,904 भूस्खलनों का मैदानी सत्यापन हुआ। राज्यवार आंकड़ों में हिमाचल प्रदेश सबसे अधिक संवेदनशील (29 प्रतिशत उच्च संवेदनशीलता) है।
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इसी तरह लद्दाख में 21, नगालैंड में 21, मणिपुर में 18, सिक्किम में 18, बंगाल में 17, मिजोरम में 16, अरुणाचल प्रदेश में 15, केरल में 13 और जम्मू-कश्मीर में 12 प्रतिशत क्षेत्र उच्च संवेदनशील है। महाराष्ट्र में छह, कर्नाटक में चार, गोवा में तीन, असम व त्रिपुरा में दो-दो तथा मेघालय में एक प्रतिशत क्षेत्र उच्च संवेदनशीलता वाला है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में यह आंकड़ा छह-छह प्रतिशत है। सभी राज्यों को मिलाकर 15 प्रतिशत उच्च संवेदनशीलता श्रेणी में है।
1:10000 और 1:5000 पैमाने पर मैपिंग
जीएसआई अब 1:10000 और 1:5000 पैमाने पर विस्तृत अध्ययन कर रहा है। 200 महत्वपूर्ण क्षेत्रों का चयन किया गया है और इन्हें वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 1:50000 स्केल में नक्शे का एक सेंटीमीटर जमीन पर 500 मीटर और 1:10000 में 100 मीटर दर्शाता है।
पूर्वानुमान प्रणाली पर भी जोर
जीएसआई मैपिंग के आधार पर लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित कर रहा है। केंद्रीय एजेंसियों व राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ आंकड़ों का एकीकरण किया जा रहा है। बीते मानसून से आठ राज्यों के 21 जिलों के लिए परिचालन व प्रयोगात्मक भूस्खलन पूर्वानुमान बुलेटिन शुरू किए गए थे। इनमें उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल शामिल हैं।
