नंदा की चौकी पुल एप्रोच रोड धंसाव: अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल, जांच रिपोर्ट में क्या?
नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसाव मामले में क्षेत्रीय मुख्य अभियंता की जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में लोक निर्माण विभाग के अधिकारि ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
नंदा की चौकी पुल धंसाव जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी गई।
पुल डिजाइन में लोक निर्माण विभाग अधिकारियों की भूमिका पर सवाल।
पीडब्ल्यूडी ने टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया।
जागरण संवाददाता, देहरादून। नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड पर 28 जुलाई को हुए धंसाव के मामले में क्षेत्रीय मुख्य अभियंता की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है। हालांकि, रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि पुल के डिजाइन को लेकर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्योंकि, किसी भी पुल के डिजाइन पर अंतिम निर्णय अधीक्षण अभियंता समेत विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं का होता है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि डिजाइन में सुरक्षा के सभी आवश्यक प्रावधान शामिल हों। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी केवल कंसल्टेंट पर नहीं डाली जा सकती।
जिस अतिवृष्टि से पुल टूटा, उसी को डिजाइन में जगह नहीं
पुराने पांवटा साहिब राजमार्ग पर टौंस नदी स्थित नंदा की चौकी का पुल 15 सितंबर 2025 की मध्यरात्रि अतिवृष्टि के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद पुनर्निर्मित पुल को 12 जुलाई 2026 को यातायात के लिए खोला गया। लेकिन 28 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे पुल की एप्रोच रोड धंस गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 12 घंटे के भीतर मरम्मत कर यातायात बहाल कर दिया गया था।
क्षेत्रीय मुख्य अभियंता की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कई सवालों के जवाब बाकी
अब यह सवाल उठ रहे हैं कि जिस अत्यधिक तेज बहाव के कारण पुराना पुल क्षतिग्रस्त हुआ था, उसी खतरे को ध्यान में रखते हुए नए डिजाइन में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय क्यों नहीं जोड़े गए। यदि जांच रिपोर्ट में इन प्रावधानों के अभाव का उल्लेख है तो यह संबंधित अधिकारियों की दूरदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
सुरक्षा दीवार आगे करने पर भी सवाल
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि टौंस नदी पर पहले बनी सुरक्षा दीवार नदी की वास्तविक चौड़ाई के अनुरूप पीछे की ओर थी। जबकि पुनर्निर्माण के दौरान नई सुरक्षा दीवार को कई मीटर आगे बना दिया गया। इससे नदी की वास्तविक चौड़ाई प्रभावित हुई। बताया जा रहा है कि नई दीवार के पीछे रास्तेनुमा जगह बच गई है, जिसका उपयोग आसपास के निर्माण कार्यों के लिए किया जा सकता है। यदि ऐसा है तो यह भी गंभीर विषय है, क्योंकि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में इस तरह का हस्तक्षेप भविष्य में भी भारी पड़ सकता है।
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टेंडर प्रक्रिया मानकों के अनुरूप
नंदा की चौकी पुल की निविदा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्पष्ट किया है कि टेंडर पूरी तरह उत्तराखंड प्रोक्योरमेंट नियमावली-2025 के तहत ई-टेंडरिंग से किया गया। विभाग के अनुसार पहली बार 14 नवंबर 2025 को जारी टेंडर में दो कंपनियों ने भाग लिया, लेकिन तकनीकी जांच में केवल एक फर्म पात्र पाई गई। एकल वित्तीय बोली की स्थिति बनने पर नियमों के अनुसार निविदा निरस्त कर दी गई।
दूसरी बार में दो कंपनियों ने बोली लगाई
इसके बाद 3 जनवरी 2026 को दोबारा ई-टेंडर जारी किया गया। दूसरी बार भी दो कंपनियों ने बोली लगाई, लेकिन तकनीकी मूल्यांकन में फिर केवल हिमालयन कंस्ट्रक्शन ही पात्र रही। इसके बाद नियमानुसार उसी से अनुबंध कर पुल का निर्माण कराया गया। विभाग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही और सभी पात्र फर्मों को भाग लेने का अवसर दिया गया।