ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में कैलाश खेर के 'जोगी' एलबम का भव्य विमोचन, गंगा आरती में हुए शामिल
प्रसिद्ध गायक पद्मश्री कैलाश खेर के 'जोगी' एलबम का विमोचन परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के गंगा तट पर हुआ। यह एल्बम सनातन धर्म, आदि शंकराचार्य के जीवन और भार ...और पढ़ें

परमार्थ निकेतन के समीप गंगा घाट पर गंगा आरती में स्वामी चिदानंद सरस्वती के साथ गायक कैलाश खेर। परमार्थ

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जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर प्रसिद्ध गायक पद्मश्री कैलाश खेर की जोगी एलबम का विमोचन हुआ। इसके बाद उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में गंगा आरती में सहभाग किया।
विमोचन में अवसर पर गायक कैलाश खेर ने बताया कि जोगी एलबम में जोगी गीत सनातन धर्म की अमर चेतना, भारत के ऋषियों की तपश्चर्या और आदि शंकराचार्य के दिव्य जीवन का संगीतमय वंदन है।
उन्होंने बताया कि जोगी में आदि शंकराचार्य के बाल्यकाल से संन्यास, भारत भ्रमण, शास्त्रार्थ, धर्म पुनर्जागरण और राष्ट्र की आध्यात्मिक एकता के दिव्य अभियान को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
यह गीत भारत की उस सनातन आत्मा का स्मरण है, जिसने युगों-युगों तक धर्म, ज्ञान और संस्कृति की ज्योति प्रज्वलित रखी।
कैलाश खेर ने कहा कि उनकी जोगी एलबम के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि सनातन संस्कृति अडिग है, अमर है और मेरुदंड की तरह दृढ़ता से खड़ी है। अनेक आक्रमण, चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों आईं, लेकिन भारत की आध्यात्मिक चेतना कभी पराजित नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि भारत जैसा देश विश्व में दूसरा नहीं, जहां संस्कृति, करुणा, ज्ञान और अध्यात्म साथ-साथ प्रवाहित होते हैं। जिन्होंने मंदिरों, परंपराओं और आस्थाओं को मिटाने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास से मिट गए, पर सनातन की ज्योति आज भी उतनी ही तेजस्वी होकर जगमगा रही है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि संगीत जब साधना बनता है, तब वह केवल स्वर नहीं रहता, वह ईश्वर का संदेश बन जाता है। कैलाश खेर का जोगी भारत की आध्यात्मिक धरोहर और गुरु परंपरा को समर्पित एक दिव्य स्तुति है।
उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारत को केवल दार्शनिक दृष्टि ही नहीं दी, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधा। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी उनके जीवन, त्याग, ज्ञान और राष्ट्रधर्म से प्रेरणा ले और अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।