ऋषिकेश में एमडीडीए का बड़ा अभियान, अवैध निर्माण और प्लाटिंग पर चला बुलडोजर
एमडीडीए ने ऋषिकेश में अवैध निर्माण और भूमाफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की, जिसमें तीन बहुमंजिला इमारतों को सील किया गया। ...और पढ़ें

ऋषिकेश में एमडीडीए की ओर से सील किए गए अवैध बहुमंजिला भवन। प्राधिकरण
HighLights
एमडीडीए ने ऋषिकेश में अवैध निर्माण पर कार्रवाई की
तीन बहुमंजिला इमारतें सील, अवैध प्लाटिंग ध्वस्त हुई
अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा
जागरण संवाददाता, देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने ऋषिकेश में अवैध निर्माण और भूमाफिया पर मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ पांच स्थानों पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण अभियान चलाया।
कार्रवाई के दौरान बिना मानचित्र स्वीकृति के बनाई जा रही तीन बहुमंजिला इमारतों को सील कर दिया गया, जबकि कई बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को जेसीबी से ध्वस्त किया गया।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि अनधिकृत निर्माण और अवैध कालोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
एमडीडीए की प्रवर्तन टीम ने सबसे पहले गंगानगर स्थित परशुराम चौक के निकट बिना स्वीकृति बनाए जा रहे एक बहुमंजिला भवन को सील किया।
इसके बाद आमबाग क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर करीब पांच बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाकर बनाई गई सड़कें, भूखंडों का सीमांकन और अन्य विकास कार्य ध्वस्त कर दिए गए।
अभियान के अगले चरण में आमबाग स्थित गायत्री विला क्षेत्र और गली नंबर-2 में बिना स्वीकृति निर्मित दो अन्य बहुमंजिला भवनों पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई।
एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार सभी निर्माण कार्य बिना मानचित्र स्वीकृति और प्राधिकरण की अनुमति के किए जा रहे थे, जिसके चलते नियमानुसार कार्रवाई की गई।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार सुनियोजित शहरी विकास सरकार की प्राथमिकता है।
बिना अनुमति प्लाटिंग कर लोगों को भूखंड बेचने और अवैध निर्माण करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
अवैध कालोनियों पर इसलिए सख्त है एमडीडीए
एमडीडीए उपाध्यक्ष के अनुसार ऋषिकेश क्षेत्र में लंबे समय से अवैध प्लाटिंग और बिना स्वीकृति बहुमंजिला निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं।
जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई। प्राधिकरण का कहना है कि अनधिकृत कालोनियां बनने से सड़क, पेयजल, सीवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
यही कारण है कि ऐसे मामलों में 'जीरो टालरेंस' नीति के तहत लगातार बुलडोजर और सीलिंग अभियान चलाया जा रहा है।
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