मसूरी के 49 डिफॉल्टर होटलों पर NGT सख्त, 6 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मसूरी के 49 होटलों पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी के मामले में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) से छह ह ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
एनजीटी ने मसूरी के 49 होटलों पर कार्रवाई की समीक्षा की।
यूकेपीसीबी को छह हफ्ते में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश।
सभी होटल वैध कंसेंट टू ऑपरेट और मानकों का पालन करें।
अंकुर अग्रवाल, देहरादून। पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने वाले होटलों पर अब शिकंजा कसा जा रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मसूरी के 49 होटलों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा करते हुए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) को छह हफ्ते के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकरण ने साफ कहा है कि कोई भी होटल वैध कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) के बिना संचालित नहीं होना चाहिए और सभी पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि यूकेपीसीबी 49 होटलों के सीटीओ की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया। इस पर अधिकरण ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बोर्ड यह सुनिश्चित करे कि सभी होटल केवल वैध अनुमति के साथ ही संचालित हों।
यह मामला वर्ष 2022 से एनजीटी में लंबित है। दिसंबर-2025 में अधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 49 डिफॉल्टर होटलों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (ईसी) की कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। उसी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पर अब सुनवाई हुई।
यूकेपीसीबी ने अधिकरण को बताया कि 49 में से 19 होटलों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का अंतिम निर्धारण कर जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें कई होटल संचालकों ने आदेशों के खिलाफ अपील दायर कर दी है, जबकि कई ने अब तक क्षतिपूर्ति राशि जमा नहीं कराई है।
केवल कुछ मामलों में ही जुर्माना जमा हुआ है। रिपोर्ट में ऐसे होटल भी दर्ज हैं, जिन्होंने लाखों रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के बावजूद भुगतान नहीं किया। शेष 30 होटलों को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। इनमें से 12 पर अब पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगा दी गई है, जबकि बाकी 18 मामलों में कार्रवाई अंतिम चरण में है। यूकेपीसीबी ने अधिकरण को भरोसा दिलाया कि इन सभी मामलों में चार सप्ताह के भीतर अंतिम आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
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जब कार्रवाई हो चुकी तो कैसे चल रहे होटल
एनजीटी ने केवल जुर्माना लगाने तक ही मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि यह भी पूछा कि जिन होटलों पर कार्रवाई हुई है, वे फिलहाल किस आधार पर संचालित हो रहे हैं। बोर्ड जब इसका स्पष्ट उत्तर नहीं दे सका तो अधिकरण ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी होटल वैध सीटीओ के साथ ही संचालित हों व पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
पर्यटन नगरी में बढ़ रहा पर्यावरणीय दबाव
मसूरी में वर्षों से सीवेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट निस्तारण, जल स्रोतों पर दबाव और अनियंत्रित होटल निर्माण जैसे मुद्दे उठते रहे हैं। पर्यावरणविद लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी पर्यटन नगरी के पारिस्थितिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यही वजह है कि एनजीटी इस पूरे मामले की लगातार निगरानी कर रहा है और अब कार्रवाई को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने के संकेत दे चुका है।